डीआईजी जे. रविंद्र गौड़ ने बताया कि वादी संवाद दिवस के लिए परिक्षेत्र के सभी जिले के एसएसपी, एसपी को आदेश दिया गया है। प्रत्येक बुधवार थाने में वादी को बुलाकर संवाद स्थापित किया जाय। समय का निर्धारण इस प्रकार किया जाय कि जब सीओ/अपर पुलिस अधीक्षक संवाद में समय से भाग ले सकें। वादी को बीट पुलिस अफसर के माध्यम से आयोजन के 02 दिन पूर्व सूचना प्राप्त कराई जाए, जिससे वादी से विवेचक, थाना प्रभारी, क्षेत्राधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक संवाद स्थापित कर सकें, जिससे वादी की दुविधाओं (शंकाओं) एवं समस्याओं का समाधान हो सके।
- एडीजी ने जाम से मुक्ति का अभियान चलाया (मोहद्दीपुर से शुरुआत हुई, डेढ़ महीने बाद ही व्यवस्था पहले की तरह हो गई)।
- एडीजी ने ऑपरेशन तमंचा चलाया (इसका असर भी सामने आया, जिले में कई अवैध असलहे पकड़े गए)
- एडीजी ने ही ऑपरेशन दस्तक (बदमाशों की निगरानी करनी थी, अभी गगहा में ही हुई काजल की हत्या में यह फेल पाया गया)।
- बीट पुलिस अधिकारी की शुरुआत (यह भी प्रभावी नहीं हो पाया है, गगहा में एडीजी की जांच में यह फेल पाया गया)।
- ऑपरेशन शिकंजा (इसका असर हुआ और हाल ही में बहराइच के एक मामले में पैरवी कर मृत्युदंड की सजा सुनाई गई)।
- एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु का ऑपरेशन न्याय (पुरानी विवेचना को निपटाना था, पहले असर फिर जाने पर काम बंद)।
- ऑपरेशन-15 (15 साल पहले तक बड़े अपराध में शामिल बदमाशों का नया डोजियर तैयार हुआ, पुलिस के पास रिकॉर्ड आ गया, लेकिन निगरानी नहीं हो पा रही है)।
- ऑपरेशन हंट (ऑपरेशन-15 में बचे बदमाशों के लिए लिए चलाया गया था यह भी अब बंद हो चुका है)।
- नवागत एसएसपी ने वांछित गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया है जिसका असर भी हो रहा है।
- एक अपराधी अभियान (इसके तहत पुलिस वाले एक बड़े अपराधी से संपर्क कर निगरानी कर रहे है, ताकि पुलिस का खौफ बना रहे)।