दोनों व्यापारियों का जुगाड़ इतना तगड़ा है कि ड्रग विभाग से लेकर नारकोटिक्स तक के आला अधिकारियों को मैनेज कर लेते थे। इस बार सूचना हाईकमान के अधिकारियों को हो गई, तो मामला मैनेज नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग के एक बड़े अधिकारी से संपर्क है। दोनों की फाइलें अधिकारी अपने पास ही रखता है। इसी दम पर दोनों भाई बेखौफ होकर नशीली दवाओं की सप्लाई करते हैं।
पिछले साल नारकोटिक्स की टीम ने मारा था छापा
पिछले साल फरवरी में नारकोटिक्स विभाग की टीम ने इनकी फर्म पर छापा मारा था। इस दौरान जांच में यह बात सामने आई थी कि छह महीने पहले इन लोगों ने 88 हजार बोतल फेंसिडिल की मंगाई थी। इसमें 66 हजार बोतल का ही हिसाब दे सके थे। 22 हजार फेंसिडिल की बोतल का हिसाब विभाग को नहीं मिला था। इसके बाद मामला मैनेज हो गया था।
गोरखपुर में नाम मात्र की बिकती है फेंसिडिल
बताया जाता है कि बड़ी मात्रा में फेंसिडिल की सप्लाई भालोटिया मार्केट में है। इसकी एक बोतल की कीमत 150 से 160 रुपये है, लेकिन यह सिरप गोरखपुर में नाम मात्र की बिकती है। 95 फीसदी डॉक्टर इसे लिखते ही नहीं हैं।
नेपाल सीमा पर भी पकड़ी गईं थीं करोड़ों की नशीली दवाएं
ड्रग विभाग की टीम ने नेपाल सीमा के सोनौली में पिछले साल करोड़ों रुपये की नशीली दवाएं पकड़ी थीं। उस वक्त भी भालोटिया के दो दवा व्यापारियों के नाम सामने आए थे। उस वक्त ड्रग विभाग की टीम ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने कहा कि ड्रग विभाग ने सूचना के आधार पर कार्रवाई की है। नशे के कारोबारियों के खिलाफ अभियान चलता रहेगा। मामले की जांच की जा रही है। एक भी आरोपी बख्शे नहीं जाएंगे।