धंधेबाजों ने तस्करी का नया ट्रेंड ईजाद किया है। सऊदी अरब से जैकैट-कुर्ते के बटन में सोना छिपा कर लाया जा रहा है। जल्दी अमीर बनने का लालच देकर युवाओं को फंसाकर तस्करी का खेल कराया जा रहा है।
गोरखपुर के हिंदी बाजार के धंधेबाजों ने सोने की तस्करी का नया तरीका ईजाद किया है। ब्लेजर, सदरी, हाफ कट जैकेट, जोधपुरी कुर्ते के बटन में सोने की तस्करी की जा रही है। बंबइया तस्करी के इस सोने को गलाने के बाद टंच लगाकर पक्का सोना बना देते हैं और माल धंधेबाजों के पास पहुंच जाता है।
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इसके बदले इन्हें ठीक-ठाक कमीशन मिलता है। बटन के रूप में सोने की तस्करी की सूचना एजेंसी के पास भी पहुंच गई है। एजेंसी सूत्रों की मानें तो विदेश से सोने की तस्करी में अब कम उम्र के युवा ज्यादा सामने आ रहे हैं। एक धंधेबाज के आठ से दस लड़के टूरिस्ट वीजा पर विदेश जाते हैं।
वहां से ब्लेजर और जैकेट में 250 से 350 ग्राम सोने का बटन लगवा ले रहे हैं। इसके बाद बटन के ऊपर उसी कपड़े के रंग के धागे से दो परत की मोटी सिलाई कर दी जा रही है। ऐसे नौ बटन (तीन ब्लेजर के सामने, तीन-तरीन दोनों बाजुओं पर) वाला ब्लेजर पहन कर एक तस्कर वहां से भारत आता है।
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सोने के ढाल के ऊपर बटन की साइज निर्भर करता है। ऐसे में 38 से 40 ग्राम के एक सोने के बटन के साथ एक ब्लेजर पर लगभग 350 ग्राम सोना खपाकर तस्कर विदेश से भारत आते हैं और फिर वहां से सड़क मार्ग से गोरखपुर। ऐसे अगर एक फ्लाइट में एक साथ 8 तस्कर भी सफर कर रहे तो लगभग ढाई से तीन किलो सोने की तस्करी हो जाती है।
लगभग 28 से तीस लाख रुपये का मुनाफा
सूत्रों ने बताया कि 250 ग्राम बुलियन सोना लगभग 18 लाख रुपये का होगा, जबकि बैंक वाला भारतीय सोना 20 लाख रुपये का पड़ेगा। ऐसे एक किलो अवैध सोना 72 से 74 लाख रुपये प्रति किलो पड़ जा रहा है, जबकि भारतीय सोना 80 से 81 लाख रुपये प्रति किलो का पड़ रहा है। इस हिसाब से अगर तीन किलो अवैध सोना भी विदेश से आ गया तो लगभग 28 से तीस लाख रुपये धंधेबाज का मुनाफा हो जाता है।
तीन दिन में आठ से दस किलो सोने की तस्करी
ये धंधेबाज इन दिनों लगातार अलग-अलग फ्लाइट से कम समय में अमीर बनने की चाह वाले युवाओं को इस धंधे में खपा कर हफ्ते में तीन दिन में आठ से दस किलो सोने की तस्करी करा ले रहे हैं। धंधेबाजों के इस खेल पर अब एजेंसियों की भी नजर लग गई है और उसे रोकने के लिए कार्रवाई में जुट गए हैं।
धंधेबाजों से मिले हैं कुछ बंबइया
धंधेबाजों ने इस काम में बंबइया को भी सेट कर रखा है और उन्हें प्रति किलो के हिसाब में मोटा मुनाफा देते हैं। बंबइया बुलियन के इस सोने को भट्ठी या एक्वा मशीन में गला कर रिफाइन करते हैं और सोने की गुणवत्ता निकालते हैं। सोने का गलाकर रिफाइन कर उसे 99.50 टंच ( बैंक सोना) बनाकर उसपर अपनी मोहर लगाकर उसे भारतीय सोना बना देते हैं और फिर धंधेबाजों को दे देते हैं। धंधेबाज कारीगर से उस सोने के आभूषण बनवाकर अपनी फर्म और बीआईएस मोहर लगाकर ग्राहकों या दूसरे दुकानदारों को बाजार भाव पर बेच देते हैं।
गोरखपुर के अलावा-आसपास भी खपा रहे
विदेश से तस्करी कर लाए गए सोने को अयोध्या, बस्ती और लखनऊ में भी खपाया जा रहा है। इसके अलावा एक हिस्सा दिल्ली तक भेज दिया जाता। वहीं, कोलकाता से ट्रेन के रास्ते आने वाला ब्लेजर बिहार और देवरिया के साथ हिंदी बाजार में खप रहा है।
दिल्ली में पकड़ी गई सोने के बटन लगी शर्ट
एक सप्ताह पहले सऊदी अरब के जेद्दा से दिल्ली आए एक यात्री को सोने की तस्करी में पकड़ा गया था। वह शर्ट के बटन में सोना छिपाकर ला रहा था। बरामद सोने की कीमत करीब 29 लाख रुपये बताई गई।