बाजार में सोने की रिफाइनरी (गलाने) का काम करने वाले अपंजीकृत व्यापारी इसे खपाते हैं। तस्कर से व्यापारी एक या दो घंटे का समय लेते हैं और बिचौलियों के माध्यम से फुटकर और थोक दुकानों पर इसे बेचवा देते हैं और तस्करी कर लाने वाले को तय धनराशि दे देते हैं। यह सोना बिना मार्का और लिखापढ़ी के प्लेन बिस्कुट, टुकड़े या तरल तत्व में होता है। सोने का काला धंधा करने वाले दुकानदार उसी सोने से अलग-अलग डिजाइन का आभूषण तैयार करवाते हैं और फिर उस पर फर्जी हॉलमार्क लगवा देते हैं। इस तरह अवैध सोने को वैध करने का खेल खेला जाता है।
यहां संचालित होता है धंधा
सूत्रों के मुताबिक सराफा बाजार के हरबंश राम गली, बंगाली गली, चौधरी गली, घंटाघर से थोड़ा आगे बाएं तरफ की गली में अवैध सोना गलाने का काम होता है। कुल मिलाकर लगभग 28 से 30 दुकानें हैं, जहां विदेशों से तस्करी कर लाए गए सोने को गलाकर उसकी पहचान बदल दी जाती। इसके बाद इन्हें खपाया जाता है।
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विदेशों से आता है सोना
बैंकाक, इंडोनेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड के रास्ते से प्रतिदिन अलग-अलग तरीके से अवैध सोना आता है। ये कोलकाता के माध्यम से सड़क या ट्रेन मार्ग से होकर शहर में आता है। जबकि, नेपाल से आने वाला अवैध सोना यूपी की कई सीमाओं से होकर गोरखपुर पहुंचता है।
सोने की गुणवत्ता का मानक
भारतीय सोना
24 कैरेट 99.50 टंच
विदेशी सोना
24 कैरेट 99.99 टंच