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रश्मि वर्मा: मिट्टी को तपाकर बना रहीं सोने जैसी ज्वेलरी, विदेशों से आ रही डिमांड

Mon, 25 Sep 2023 02:39 PM IST
vivek shukla अमर उजाल ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

टेराकोटा के ज्वेलरी की कारीगर रश्मि वर्मा ने कहा कि ट्रेड फेयर में दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद के व्यापारियों के अलावा दुबई और रूस के व्यापारियों ने भी प्रोडक्ट का सैंपल लिया है। सभी ने इन नए डिजाइन और इसके निर्माण में प्रयुक्त प्राकृतिक वस्तुओं की सराहना की है।
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टेराकोटा की ज्वेलरी बनाने वाली रश्मि वर्मा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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आर्टिफिशियल ज्वेलरी के बाद अब टेराकोटा ज्वेलरी की भी डिमांड बढ़ने लगी है। मिट्टी को तपाकर सोने जैसी बन रही इस ज्वेलरी को ग्रेटर नोएडा के इंटरनेशनल ट्रेड फेयर ने दुबई और रूस जैसे देशों तक पहुंचा दिया है। गोरखपुर की रश्मि वर्मा के साथ करीब 200 महिलाएं इस कारोबार से जुड़ी हैं।

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औरंगाबाद गांव समेत आसपास के कई गांवों में टेराकोटा की मूर्तियां बनती हैं। इन्हीं मूर्तियों को देखकर शहर के खजांची चौक इलाके में रहने वालीं रश्मि वर्मा भी प्रेरित हुईं। वर्ष 2014 में इस काम से जुड़ीं रश्मि ने जल्दी ही कुछ नया करने की सोची और मूर्तियों के लिए माला बनाने लगीं। शौकिया तौर पर शुरू किए गए इस काम को पहचान मिलने लगी।

शुरू में रुद्राक्ष की माला बनाने वाली रश्मि ने जल्दी ही इसकी बारीकियों को सीखा और नए-नए डिजाइन के आभूषण बनाने लगीं। आसपास के बाजारों के अलावा कई बड़े शो में भी इन आभूषणों की प्रदर्शनी लगाई गई। उत्साह बढ़ा तो रश्मि ने इसमें एक और नया प्रयोग किया और कुशीनगर की एक संस्था से केले के तने के रेशा से बना धागा लेकर नए डिजाइन का माला बनाना शुरू किया। इस माला को ग्रेटर नोएडा के इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शनी के लिए रखा गया है।
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जल्दी ही आर्डर मिलने की उम्मीद

टेराकोटा के ज्वेलरी की कारीगर रश्मि वर्मा ने कहा कि ट्रेड फेयर में दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद के व्यापारियों के अलावा दुबई और रूस के व्यापारियों ने भी प्रोडक्ट का सैंपल लिया है। सभी ने इन नए डिजाइन और इसके निर्माण में प्रयुक्त प्राकृतिक वस्तुओं की सराहना की है। यह आभूषण आग में तपाकर बनाए गए हैं, इसलिए पसीने से खराब भी नहीं होंगे।

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इनका वजन भी अन्य आभूषण की तरह हल्का है। महिलाएं आर्टिफिशियल ज्वेलरी के स्थान पर इसका खूब प्रयोग कर रही हैं। अब तक करीब 200 महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इनमें से करीब 80 महिलाएं हर दिन आभूषण बना रही हैं।
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