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UP Election 2022: ‘स्वस्थ लोकतंत्र के लिए नोटा नहीं, प्रत्याशी का चुनाव करें’

Thu, 17 Feb 2022 01:51 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

अमर उजाला फाउंडेशन की अनूठी मुहिम के तहत बुधवार को सिटी कार्यालय में आयोजित मतदाता जागरुकता संवाद के दौरान अपने विचार व्यक्त किए। उनका कहना है कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए नोटा नहीं, बल्कि प्रत्याशी का चुनाव करें। 
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यूपी चुनाव को लेकर चर्चा करती युवतियां। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मजबूत लोकतंत्र के लिए शत प्रतिशत मतदान जरूरी है। नन ऑफ द एबव (नोटा) का बटन दबाने का अर्थ हुआ कि आपका प्रतिनिधित्व सरकार में नहीं होगा। नोटा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन लोकतंत्र में मतदान आवश्यक है। लिहाजा, अच्छे प्रत्याशी या फिर पार्टी का विकल्प तलाशा जा सकता है। यह कहना है शहर की युवतियों का।

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उन्होंने अमर उजाला फाउंडेशन की अनूठी मुहिम के तहत बुधवार को सिटी कार्यालय में आयोजित मतदाता जागरुकता संवाद के दौरान अपने विचार व्यक्त किए। उनका कहना है कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए नोटा नहीं, बल्कि प्रत्याशी का चुनाव करें।  

लोकतंत्र में एक-एक वोट बहुत कीमती होता है। नोटा का बटन दबाकर अपना मत बेकार करने की जरूरत नहीं है। उम्मीदों पर खरे उतरने वाले प्रत्याशी का चुनाव करना चाहिए। मतदाताओं को मतदान के लिए आगे आना चाहिए।-अंजली जायसवाल, कथक छात्रा
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नोटा का विकल्प तब तक बेकार है, जब तक उसे कारगर न बनाया जाए। यदि एक लाख वोटरों में से साठ हजार ने नोटा दबाया है तो भी सबसे अधिक मत पाने वाले प्रत्याशी को विजेता घोषित किया जाता है। इससे बेहतर तो मनपसंद प्रत्याशी या पार्टी को चुनना ठीक रहेगा।-प्रिया त्रिपाठी, शास्त्रीय नृत्य विशेषज्ञ  

नोटा का विकल्प रहना चाहिए, लेकिन वोट भी जरूरी है। यह किसी भी पार्टी या उसके प्रत्याशी को दिया जा सकता है। जितना ज्यादा मतदान होगा, उतना ही लोकतंत्र मजबूत होगा। मजबूत सरकार के गठन लिए मतदान करने में लोगों को रुचि लेनी चाहिए। -अंजली गुप्ता, ताइक्वांडो खिलाड़ी

 नोटा दबाने से कम पसंद का प्रत्याशी भी जीत सकता है। लिहाजा, अच्छे प्रत्याशी का चुनाव जरूरी है। यह तभी संभव है, जब निश्चित मतदान किया जाए। मतदान हमारा संवैधानिक अधिकार है, इसलिए अपने इस अधिकार का उपयोग करना चाहिए।-श्रद्धा शर्मा, बीटेक छात्रा

चुनाव में मत न देकर या नोटा डालकर अपना विरोध जताना, मेरी नजर में उचित नहीं है। वोट डालने से पहले सभी प्रत्याशियों के कार्य, सार्वजनिक जीवन, सामाजिक कार्यों का आंकलन करने पर जो सबसे बेहतर लगे, उसे चुनें, यह विकल्प ज्यादा अच्छा होगा। -प्रतिज्ञा उपाध्याय, सैन्य सेवा अभ्यर्थी

 जब कोई विकल्प न हो तो नोटा बचता है। चुनाव पांच साल की यात्रा है। यदि हमने प्रत्याशी को न चुन कर नोटा दबाया तो इसे सुधारने के लिए लंबा इंतजार करना होगा। नोटा नहीं, प्रत्याशी चुनें, यही बेहतर होगा। -डॉ. आकृति विज्ञा, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता

नोटा का विकल्प चुनावी नजरिए से ठीक है, लेकिन इसका इस्तेमाल मेरी नजर में उचित नहीं है। नोटा दबाने का अर्थ है कि आपकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था नहीं रही। आप किसी सरकार को नहीं चुनना चाहते, अराजकता का पक्ष ले रहे हैं। लोकतंत्र में यह उचित नहीं है। -प्रीति, छात्रा, राजनीति विज्ञान

यदि आपको लगता है कि सभी प्रत्याशी खराब हैं तो उनमें सबसे कम खराब का चुनाव करना बेहतर विकल्प होगा। कहीं ऐसा न हो कि नोटा दबाने से वह प्रत्याशी चुन लिया जाए, जो सबसे ज्यादा खराब हो। -नम्रता चौधरी, स्नातक छात्रा

 चुनाव आयोग के ई केवाईसी एप पर प्रत्याशी का चरित्र, संपत्ति, आपराधिक इतिहास देखा जा सकता है। ऐसा करने पर निश्चित ही ऐसा प्रत्याशी मिल जाएगा, जिसकी छवि अपेक्षाकृत स्वच्छ हो। नोटा की जगह उसे वोट दिया जाना बेहतर होगा। -शिवानी चौधरी, छात्रा राजनीति विज्ञान

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