क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) में जीनोम सीक्वेसिंग हो सकेगी। इसके लिए जीन सीक्वेंसर का ऑर्डर कंपनी को दिया जा चुका है। इस सुविधा के यहां उपलब्ध होने के बाद नमूने जांच के लिए दिल्ली, पुणे और लखनऊ नहीं भेजे जाएंगे। आरएमआरसी के पांच मंजिला भवन में नौ लैब बनाई गईं हैं। इनका लोकार्पण सात दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगा।
हर तरह के वैरिएंट का लग जाएगा जल्द से जल्द पता
आरएमआरसी के मीडिया प्रभारी डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि जीनोम सीक्वेसिंग के लिए लैब बनकर तैयार हो चुकी हैं। मशीन का ऑर्डर भी दिया जा चुका है। यह जल्द से जल्द मिल जाएगी। इस सुविधा के बाद से कोरोना के सभी प्रकार के वैरिएंट का पता गोरखपुर में ही लगाया जा सकेगा। डेल्टा, डेल्टा प्लस से लेकर कप्पा और ओमिक्रॉन तक की सटीक जानकारी हो सकेगी। इस काम के लिए नमूने कहीं बाहर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लखनऊ और वाराणसी के बाद पूर्वांचल में यह सुविधा गोरखपुर में मिलेगी।
ये लैब बनकर हो गईं हैं तैयार
- इम्युनोलॉजी: वैक्सीन की प्रतिरोधक क्षमता तथा उसके प्रभाव पर शोध होंगे।
- मॉलीक्युलर बायोलॉजी: जीनोम सिक्वेंसिंग की जा सकेगी। अभी जीन सीक्वेसिंग के लिए नमूने दिल्ली और पुणे भेजे जाते हैं।
- माइकोलॉजी: फंगस की जांच सहित शोध हो सकेगा।
- मेडिकल इंटेमोलॉजी: डेंगू, चिकनगुनिया, इंसफेलाइटिस आदि के वाहक कीटों पर शोध होगा।
- नान कम्युनिकेबल डिजीज: मधुमेह व हाइपरटेंशन के कारणों की जांच की जाएगी।
- माइक्रोबायोलॉजी: वायरस और बैक्टीरिया पर शोध होंगे।
- सोशल विहैवियर स्टडी: मानसिक बीमारियों पर शोध किया जाएगा।
- हेल्थ कम्युनिकेशन: बीमारियों की रोकथाम के उपायों के प्रचार-प्रसार का प्रमुख जरिया।
- इंटरनेशनल हेल्थ पॉलिसी: इसके जरिए विश्व स्तर पर होने वाली बीमारियों के बारे में लोगों को बताया जाएगा।