इसके अलावा आंध्र प्रदेश के तटीय इलाके में आए तूफान, गोंडा में ओवरब्रिज निर्माण, छपरा में यार्ड रिमाडलिंग के चलते ब्लॉक और प्रयागराज में प्लेटफार्म पर निर्माण कार्य के चलते ट्रेन निरस्त करने के अलावा मार्ग परिवर्तन और समय परिवर्तन किए गए हैं। इसके चलते अधिकांश ट्रेनें देरी से चल रही हैं।
ट्रेनों के निरस्त होने का सबसे अधिक असर सोमवार को गोरखपुर से लखनऊ-दिल्ली के रास्ते बठिंडा जाने वाली गोरखधाम एक्सप्रेस पर दिखा। प्लेटफार्म नंबर नौ से चलने वाली इस ट्रेन में चढ़ने के लिए यात्री आपस में भिड़ गए। अपराह्न साढ़े तीन बजे ही धक्का-मुक्की हो रही थी। मारपीट की नौबत थी।
ट्रेन के स्लीपर और जनरल कोच में सामान समेत घुस रहे यात्री जगह के लिए जूझ रहे थे। आरपीएफ इंस्पेक्टर दशरथ प्रसाद और सब इंस्पेक्टर भीम सिंह की अगुवाई में जवानों ने जनरल कोच और स्लीपर कोच में यात्रियों को समझाकर अलग किया और बैठाने में मदद भी की। स्लीपर कोच में बड़ी संख्या में जनरल टिकट लिए यात्री चढ़े हुए थे।
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जनरल नहीं ये स्लीपर कोच है
मोतिहारी के सरवन प्रसाद साथ में एक बोरा सामान लिए स्लीपर कोच में चढ़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन अंदर इतनी भीड़ थी कि बोरा बाहर ही छूट गया। किसी तरह से नीचे उतरे और गेट के पास मौजूद टीटीई को टिकट दिखाकर बोले-मुझे स्लीपर कोच में चढ़ना है।
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टीटीई ने कहा कि यह स्लीपर कोच ही है। जनरल कोच का टिकट लिए जगदीशपुर के सूर्यप्रकाश भी परेशान हाल घूम रहे थे। काफी प्रयास के बावजूद वह जनरल कोच में घुस नहीं पा रहे थे। इसके बाद एसी कोच के टीटीई के पास पहुंचे और जुर्माना जमाकर सीट दिलाने को कहा। टीटीई ने ट्रेन में भीड़ की तरफ इशारा करते हुए उल्टे ही सवाल किया कि इस भीड़ को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं कोई सीट खाली होगी।