गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने करीब 30 हेक्टेयर जमीन सुरक्षित कर ली है। इन जमीनों से जुड़े राजस्व अभिलेखों में अब प्राधिकरण का नाम दर्ज हो गया है। बाकी बची 18 हेक्टेअर जमीन भी जल्द ही सुरक्षित कर ली जाएगी।
दरअसल जीडीए द्वारा अधिग्रहित की गई कुछ जमीनों के राजस्व अभिलेखों पर अभी तक प्राधिकरण का नाम नहीं दर्ज हो सका था। इसकी वजह से कई जगहों पर भू-माफिया जमीन पर कब्जा कर रहे थे।
कुछ जगहों पर तो अधिग्रहण और मुआवजा प्राप्त करने के बाद भी काश्तकारों ने दोबारा जमीन बैनामा कर दी। धीरे-धीरे प्राधिकरण को जैसे-जैसे अपनी इस तरह की जमीन की जानकारी हो रही थी, संबंधित को नोटिस जारी कर कार्रवाई की जा रही थी। उधर इस चूक के लिए जीडीए, एसएलओ कार्यालय को तो वे सदर तहसील कार्यालय को जिम्मेदार ठहरा रहे थे।
जीडीए का कहना था कि उन्होंने मुआवजे की रकम दे दी थी। जमीन अधिगृहीत कर प्राधिकरण को देने के साथ ही राजस्व अभिलेखों पर मूल काश्तकार का नाम कटवाकर प्राधिकरण का नाम दर्ज कराना भी एसएलओ कार्यालय की जिम्मेदारी थी। उधर एसएलओ कार्यालय का कहना था कि उन्होंने फाइल भेजी लेकिन तहसील स्तर से कार्रवाई नहीं की गई।
इस रार की जानकारी जब जीडीए के अध्यक्ष व कमिश्नर रवि कुमार एनजी व उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह को हुई तो इसका स्थायी समाधान निकाला गया। कमिश्नर ने तहसील के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जीडीए और एसएलओ कार्यालय से जरूरी दस्तावेज व जानकारी प्राप्त कर अमलदरामद (खतौनी में नाम चढ़ना) की प्रक्रिया पूरी की जाए। अभी तक 29.68 हेक्टेअर जमीन का अमलदरामद कराया जा चुका है। जल्द ही 18 हेक्टेअर और जमीन पर नाम दर्ज करा लिया जाएगा।
उपाध्यक्ष जीडीए प्रेम रंजन ने बताया कि सिंह काफी पहले अधिग्रहित किए गए कुछ भूखंडों पर जीडीए का नाम नहीं दर्ज हो सका था। इसका फायदा उठाकर कुछ लोग जमीन कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। अभियान चलाकर नाम दर्ज कराया जा रहा है। अमलदरामद के लिए 47.96 हेक्टेअर जमीन के दस्तावेज भेजे गए हैं। अभी तक 29.68 हेक्टेयर जमीन का अमलदरामद हो चुका है। जल्द ही बाकी भूमि पर भी नाम दर्ज हो जाएगा।