गोरखपुर एयरफोर्स स्टेशन के पास नो कंस्ट्रक्शन जोन का दायरा 900 मीटर से घटाकर 100 मीटर करने के फैसले पर शासन की मुहर लगने के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। ऐसे में आसपास की कॉलोनियों के लोग अपने मानचित्र पास कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। जिनके निर्माण हो चुके हैं, वे शमन कराकर निर्माण को नियमित करा सकते हैं।
शासन ने नौ अगस्त को एयरफोर्स स्टेशन की बाउंड्री से 100 मीटर छोड़कर निर्माण करने की अनुमति दे दी है। कुसम्ही जंगल की ओर अभी भी नो कंस्ट्रक्शन जोन का दायरा 900 मीटर ही है। जिस ओर नो कंस्ट्रक्शन जोन का दायरा 100 मीटर किया गया है, उधर ही सारी कालोनियां हैं। यहां सैनिक विहार, सैनिक कुंज, दरगहिया जैसे कई मोहल्ले हैं। करीब 10 हजार परिवारों को इससे लाभ मिलने वाला है। इस क्षेत्र में करीब पांच हजार मकान बन चुके हैं और कई लोग वैध तरीके से मकान बनवाने के लिए नो कंस्ट्रक्शन जोन का दायरा घटाने का निर्णय आने का इंतजार कर रहे थे।
प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए भी बनेगी योजना
नो कंस्ट्रक्शन जोन होने के कारण इस क्षेत्र में जरूरतमंद लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी नहीं मिल पाता था लेकिन अब उन्हें इसका लाभ मिल सकेगा। प्रशासन की ओर से ऐसे लोगों के आवेदनों को निकालकर उसपर विचार कर आवास का तोहफा देने की तैयारी है।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र में आने वाले मोहल्लों के लोग जीडीए में आवेदन देकर अपना मानचित्र पास करा लें। जिनके निर्माण पहले से हैं वे शमन कराकर उसे नियमित करा सकते हैं। प्राधिकरण में मानचित्र पास कराने में कोई असुविधा नहीं होगी।
निस्तारित किए गए छह मामले
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने बृहस्पतिवार को भी अपने कक्ष में फरियादियों से मिलकर उनकी समस्याओं का निराकरण किया। जीडीए सचिव, संपत्ति विभाग के कर्मचारियों एवं अवर अभियंताओं की मौजूदगी में लोगों की समस्या सुनी गईं। बृहस्पतिवार को 11 मामले आए, जिनमें से छह को मौके पर निस्तारित कर दिया गया। इनमें कई समस्याएं ऐसी थीं जो लंबे समय से निस्तारित नहीं हो पा रहीं थीं। उपाध्यक्ष ने कहा कि महानगरवासियों की समस्याओं का यथा शीघ्र निस्तारण किया जा रहा है। यदि किसी को समस्या हो तो वह प्रतिदिन सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक कार्यालय में आकर उनसे मिल सकता है। उनकी समस्या को नियमानुसार निस्तारित किया जाएगा। समस्याओं का समय से निस्तारण करने से जीडीए को आय भी हो रही है। पिछले 10 दिन में प्राधिकरण आठ करोड़ रुपये की कमाई कर चुका है।