किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में भी सहायक है वर्मी कंपोस्ट
वर्मी कंपोस्ट एवं वर्मीवाश में सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, नाइट्रोजन, खनिज लवण, एंजाइम, हॉर्मोंस तथा विटामिन के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक गुण समुचित मात्रा में पाया जाता है। इसका उत्पादन तथा प्रयोग बहुत ही आसन तथा कम खर्चीला होने के कारण छोटे किसानों के लिए यह एक वरदान सिद्ध हो रहा है। वर्मीकंपोस्ट और वर्मीवाश के साथ जैविक कीटनाशकों के प्रयोग से पौधों में अच्छी वृद्धि के साथ-साथ कई तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। यह कम लागत में अधिक उपज प्रदान कर किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सकती है।
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स्वरोजगार का भी साधन है वर्मी कंपोस्टिंग
वर्मी कम्पोस्टिंग बेरोजगारों के लिए स्वरोजगार का एक अच्छा साधन है, क्योंकि खेतों बागवानी एवं घरों के बेकार कूड़े-कचरे को इकट्ठा करके केंचुए की सहायता से वर्मी कंपोस्ट में बदलकर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। तैयार वर्मीकंपोस्ट को 10 से 15 रुपये प्रति किलो की दस से बाजार में जैविक खाद के रूप में बेच कर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। वर्मी कंपोस्ट एवं वर्मीवाश के प्रयोग से रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के प्रयोग से बचने के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
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गोविवि प्राणी विज्ञान विभाग प्रो. केशव सिंह ने कहा कि रासायनिक खाद और वर्मीकंपोस्ट को लेकर खेत व खेती पर पड़ने प्रभाव पर अलग-अलग शोध किया गया। रासायनिक खाद व कीटनाशकों के प्रयोग से खेत व खेती के साथ पर्यावरण पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति क्षीण होने के साथ-साथ उपजाऊपन कम होता जा रहा है।