पश्चिम बंगाल के कोलकाता के नरेंद्रपुर थाना क्षेत्र के अर्जुन मुकुंदरपुर निवासी अनिक दत्ता, मऊ के मधुबन थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर बारहगांवा निवासी आकाश गुप्ता, कोलकाता के गार्डन रोड निवासी आशीष पांडेय, झारखंड के रांची निवासी कादिर अली, रांची के सुखदेव नगर निवासी धीरज कुमार, झारखंड के गोड्डा लालमटिया निवासी इकरामुल अंसारी, पटना, बिहार के राजीव नगर निवासी राहुल कुमार, गुलरिहा के भटहट गोरखी टोला निवासी राजन को गिरफ्तार किया गया है।
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अनिक दत्ता मास्टरमाइंड है। गिरोह में शामिल आदित्य मिश्रा, विनोद, जुनैद, अश्वनी वांछित हैं। इनकी तलाश में पुलिस टीम लगी है। आरोपियों के पास से एक माॅनीटर, पांच सीपीयू, एक सर्वर सीपीयू, एक ब्रांडबैंड, एक फिंगर प्रिंट डिवाइस, टेलीफोन, कंपनी की आईडी कार्ड, विदेशियों से बात करने वाली स्क्रीप्ट चार प्रकार की 23 पन्नों की, 17 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
इस फर्जी कंपनी को संचालित करने वाला आकाश दूसरी कक्षा तक पढ़ा है। जबकि मास्टरमाइंड दत्ता आठवीं पास है। इन दोनों ने मिलकर कोलकाता में भी कंपनी चलाया था। वहां पर इन्हें रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ते थे, फिर गोरखपुर में आठ हजार रुपये मेंं अंग्रेजी के जानकार युवा मिलने की जानकारी होने पर यहां चले आए।
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ऐसे पकड़ा गया मामला, चार महीने लगे
वहां पर काम करने वाले सभी कर्मचारी यह जानते थे कि वह कॉल सेंटर में काम कर रहे हैं। वहां जाते ही मोबाइल फोन जमा करा लिया जाता था। इस वजह से एक युवक को शक हो गया और वह सीधे एसएसपी और एसपी सिटी के पास पहुंचकर इसकी शिकायत की। इसके बाद पूरे मामले की गोपनीय जांच शुरू की गई। चार महीने पुलिस को इस जालसाजी की घटना को खोलने में लग गया।
कॉलर डेविट मारटीन बनकर कॉल करते थे। इस तरह से फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते थे कि किसी को शक न होने पाए कि कोई भारतीय बोल रहा है। हालांकि, दूसरे स्तर पर बात करने वाले की बातचीत में हिंदी भी आ जाती थी, लेकिन उसी समय एजेंसी का कॉल चले जाने और फ्रॉड के बारे में जानकारी दी जाती थी, जिस वजह से विदेशी नागरिक फंस जाते थे।