विदेश भेजने के नाम पर ठगी। (सांकेतिक)
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विजिट वीजा पर तीन युवाओं से दुबई में नौकरी के नाम पर मंगलवार को जालसाजी का मामला सामने आया है। आरोपों के आधार पर चौरीचौरा पुलिस ने आरबीएस ट्रेनिंग सेंटर के संचालक विजेंद्र सिंह के खिलाफ जालसाजी और धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि इनमें से दो युवक दुबई चले गए, पर न तो नौकरी मिली, न ही रहने की कोई व्यवस्था हो सकी। किसी तरह से दोनों परिवार की मदद से वापस घर आए हैं।
जानकारी के मुताबिक, बड़हलगंज के बैदौली गांव निवासी बब्बन, चंदन कुमार प्रजापति व नवरत्न प्रजापति ने चौरीचौरा थाने में केस दर्ज कराया है। उनका कहना है कि आरबीएस ट्रेनिंग सेंटर चलाने वाले विजेंद्र सिंह ने तीनों को विदेश भेजने के नाम पर पासपोर्ट और प्रत्येक व्यक्ति से 85 हजार रुपये लिए। विजेंद्र ने उनको विश्वास दिलाया कि यहां से आप लोग विजिट वीजा पर दुबई जाइए। वहां आप लोगों का दो साल का रोजगार वीजा कंपनी द्वारा लगवा दिया जाएगा।
विजेंद्र की बातों पर विश्वास कर बब्बन 9 अक्तूबर 2021 और चंदन 5 अक्तूबर 2021 को दुबई पहुंचे। वहां पर न तो बताई गई कंपनी थी और न ही उनके रहने खाने का कोई ठिकाना था। कंपनी के नाम पर दिया गया ऑफर लेटर भी फर्जी था। एक महीने तक वह किसी तरह वहां इस उम्मीद में रुके रहे कि काम हो जाएगा। लेकिन, जब काम नहीं हुआ तो दोनों घर से रुपये मंगा कर किसी तरह वापस आए।
नवरत्न का पासपोर्ट और पैसा ट्रेनिंग संचालक के पास ही था। उसे अभी विदेश भी नहीं भेजा गया था। आरोप है कि वापस आकर जब रुपये और पासपोर्ट वापस मांगे तो विजेंद्र धमकी देने लगा। पीड़ितों ने मामले की शिकायत चौरीचौरा पुलिस से की। पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
टूरिस्ट वीजा से अलग होता है विजिट वीजा
जब दो से अधिक देश की यात्रा की जाती है तो विजिट वीजा लेना होता है। टूरिस्ट वीजा से इसकी अवधि भी अधिक होती है। टूरिस्ट वीजा एक महीने के लिए ही मान्य होता है, जबकि विजिट वीजा तीन महीने के लिए मान्य होता है। आमतौर पर विदेश भेजकर जालसाजी के मामले में टूरिस्ट वीजा का ही इस्तेमाल ठग करते हैं, लेकिन इस मामले में विजिट वीजा का इस्तेमाल किया गया है।