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जालसाजों ने रोजगार लोन के नाम पर 60 से अधिक लोगों से की ठगी, एक गिरफ्तार

Fri, 28 Aug 2020 12:20 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना की फर्जी वेबसाइट बनाकर जालसाजी का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से पुलिस ने जालसाजी की रकम से खरीदी गई कार, चार मोबाइल सेट, फर्जी दस्तावेज आदि बरामद किया है। आरोपी ने पूछताछ में साइबर टीम को बताया कि वह 60 से ज्यादा लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुका है। उसने अपने कुछ साथियों का नाम भी बताया है, जिनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।

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पुलिस एक-एक मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। पूरा मामला धर्मशाला निवासी विशेष सिंह से 3.95 लाख की ठगी की शिकायत के बाद जांच में खुलकर सामने आया है। रकम को फर्जी खाते में भेजा गया है। पुलिस ने रकम वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी लोगों से कुल कितने रुपयों की ठगी हुई है, खातों की जांच के बाद यह सामने आ सकेगा।

ऐसे करते थे जालसाजी

आरोपी की पहचान फैजाबाद के रुदौली थाना क्षेत्र के पुरेखां निवासी दानिश खान के रूप में हुई है। एसपी क्राइम अशोक वर्मा व सीओ क्राइम प्रवीण सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर घटना का पर्दाफाश किया। एसपी ने बताया कि विशेष सिंह की शिकायत आने के बाद साइबर सेल को लगाया गया था। जिसके बाद वेबसाइट की डिटेल तथा दो नंबर मिले जिनको सर्विलांस पर लगाकर जांच शुरू की गई थी।

इसके बाद पता चला कि दानिश खान जो कि आजाद नगर इलाके में किराए का कमरा लेकर रहता था, वह ही पूरा रैकेट चला रहा है। पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर लिया जिसके बाद मामला खुलकर सामने आया गया। आरोपित से पूछताछ कर साथियों के बारे में जानकारी जुटाई गई है। सभी की तलाश की जा रही है।

रैकेट से जुड़े लोग और भी जगह पर इस तरह का काम कर रहे हैं। घटना का पर्दाफाश करने वाली टीम में निरीक्षक कन्हैया यादव, उप निरीक्षक विनायक सिंह, उपेंद्र कुमार सिंह, सिपाही मनीष यादव, राजीव यादव, प्रमोद यादव आदि शामिल थे।
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जालसाजों ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना की फर्जी वेबसाइट बनाई है। विभिन्न माध्यमों से इसका प्रचार भी किया जा रहा था। वेबसाइट पर फार्म भरवाने के नाम पर एजेंट 120 रुपये लेते थे। इसके बाद दानिश आवेदनकर्ता को दीपक श्रीवास्तव के नाम से आरबीआई का अधिकारी बन फोन करता था। व्हाट्सएप की मदद से आवेदक से लोन की मार्जिन मनी जमा कराई जाती थी। चूंकि वास्तविक योजना के तहत राशि के हिसाब से पांच, दस और पंद्रह प्रतिशत मार्जिन मनी देनी होती है इस वजह से 25 लाख रुपये लोन के लिए लोग आसानी से रकम दे देते थे।

पहले भी जेल जा चुका है आरोपी
आरोपित दानिश इसके पहले भी जेल जा चुका है। वह एक फाइनेंस कंपनी में सर्वेयर का काम करता था इस वजह से योजनाओं के बारे में उसे जानकारी रहती थी। इसके पहले उसे चोरी के मामले में कोतवाली थाने से जेल भेजा गया और चोरी की बाइक भी बरामद हुई थी।

2019 में बनाई वेबसाइट, लॉकडाउन में आए आवेदन
दानिश ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि 2019 में फर्जी वेबसाइट बनाई थी। लॉकडाउन के बाद तेजी से आवेदन आवेदन आने शुरू हो गए। करीब 600 लोगों ने लोन के लिए आवेदन किया जिनमें से 60 से 70 लोगों ने मार्जिन मनी जाति के हिसाब से पांच, दस व प्रतिशत जमा की है।
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