केंद्र सरकार का सिर्फ हॉलमार्क ज्वैलरी बेचने का आदेश अगस्त से प्रभावी हो गया है। लेकिन गोरखपुर जिले के करीब पांच हजार ज्वैलर्स ने अभी हॉलमार्क रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। ऐसे में ग्राहक और व्यापारी दोनों के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
सराफा मंडल के महामंत्री महेश वर्मा ने बताया कि जिले के पांच हजार सराफा व्यापारी अभी तक हॉलमार्क पंजीकरण नहीं करवा सके हैं। उन्होंने साफ कहा कि शादी व त्योहार के पहले व्यापारी अपना पंजीकरण अवश्य करवा लें। उपभोक्ताओं की ओर से बिना हॉलमार्क के आभूषण बेचे जाने की शिकायत मिलने पर संगठन ऐसे व्यापारियों से किनारा कर लेगा। बिना हॉलमार्क आभूषण बेचते पकड़े जाने पर संगठन किसी प्रकार का सहयोग भी नहीं करेगा।
महज 150 दुकानदारों ने करवाया है पंजीकरण
हॉलमार्किंग अनिवार्य होने के बाद जिले के कई बडे़ ज्वेलर्स रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। लेकिन छोटे ज्वेलर्स अभी हॉलमार्क वाले डीलर से ज्वेलरी ले रहे हैं। अभी जिले के सिर्फ 150 सराफा व्यापारियों ने बीआईएस में पंजीकरण करवाया है।
बिना हालमार्क आभूषण बेचना अपराध
सराफा मंडल के अध्यक्ष पंकज गोयल ने बताया कि बिना हॉलमार्क के नए आभूषणों को बेचना अपराध की श्रेणी में आएगा। सराफा मंडल ग्राहकों से अनुरोध करता है कि खरीदारी के पहले हॉलमार्क का निशान जरूर देखें। इससे उन्हें आभूषण की विश्वसनीयता का पता चलेगा।
कालाबाजारी पर रोक लगेगी
निदेशक पीसी ज्वैलर्स संजय अग्रवाल ने बताया कि ग्राहक जागरूक हो गए हैं। उन्हें पता है कि बिना हालमार्क के आभूषण लेना सही नहीं है। सरकार ने कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए इस नियम को लागू किया है।
जानिए क्या होती है हॉलमार्किंग
हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता का प्रमाण है। भारत में सोने के आभूषणों में हॉलमार्क की शुरुआत वर्ष 2000 से हुई। हॉलमार्क का निशान बताता है कि सोना अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड का है। इसे भारत सरकार की संस्था ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड यानी बीआईएस जारी करता है। इसके लिए 35 रुपये प्रति आभूषण चार्ज लगता है, जिसका भुगतान व्यापारी करता है।