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Exclusive: बस्ती में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर खिला कमल, खत्म हुआ 'वनवास'

Sun, 04 Jul 2021 02:19 AM IST
vivek shukla संतोष तिवारी, बस्ती।

सार

कांग्रेस, निर्दल, सपा, बसपा का ही अब तक रहा कुर्सी पर कब्जा, 1995 के पूर्व जिला परिषद के नाम से जानी जाती थी जिला पंचायत।
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जीत का जश्न मानाते संजय चौधरी साथ में भाजपा सांसद हरीश द्विवेदी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बस्ती में जिला पंचायत में पहली बार कमल खिला और इस जीत के साथ अध्यक्ष की कुर्सी के लिए भाजपा का बीस साल का ‘वनवास’ खत्म हो गया। यहां जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर शुरू में कांग्रेस और बाद में सपा और बसपा का ही अब तक कब्जा रहा है।

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देश आजाद होने के बाद जिला परिषद के अध्यक्ष का मनोनयन अथवा चुनाव हर पांच साल पर होता आ रहा था। इस स्थिति में बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर जनपद बस्ती जिले में शामिल थे। यहां दो बार धनुषधारी पांडेय जैसे धुरंधर कांग्रेसी जिला परिषद अध्यक्ष के रूप में कुर्सी पर बैठ चुके हैं। 1995 में पंचायती राज अधिनियम लागू होने के बाद जिला परिषद का रूप परिवर्तित होकर जिला पंचायत हो गया तो पहली बार तत्कालीन निर्दल विधायक राना कृष्ण किंकर सिंह ने अध्यक्ष पद की कुर्सी पर बैठकर जिले की पंचायत को संबोधित किया।

उसके बाद वर्ष 2000 में सपा से पूर्व एमएलसी और वर्तमान विधायक दयाराम चौधरी, 2005 में सपा सरकार के पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह की मां शारदा देवी, 2010 में तत्कालीन बसपा विधायक दूधराम की पत्नी लता देवी तथा 2015 में सपा सरकार के पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह के पुत्र देवेंद्र प्रताप सिंह ‘शानू’ को जिला पंचायत की बैठकों को बुलाने का अधिकार मिला। इस बार के चुनाव में भाजपा के संजय चौधरी को प्रचंड बहुमत के साथ जीत मिली है। अब जिले के विकास को वह कितनी गति देते हैं, इसको लेकर 43 वार्डों के सदस्यों की आगामी बैठक पर सबकी नजर होगी।
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भाजपा का जारी रहा विजय अभियान
जिला पंचायत अध्यक्ष पद मिली जीत के साथ भाजपा का विजय अभियान फिलहाल जारी है। सांसद से लेकर सभी पांचों विधानसभा क्षेत्र में कमल खिल ही चुका था, नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा की रूपम मिश्रा आसीन हैं। केवल जिला पंचायत ही एक मात्र ऐसी जगह थी, जहां कमल को खिलने की सियासी जमीन नहीं मिल पा रही थी। मगर इस चुनाव में यह मुराद भी पूरी हो गई।
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