सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय।
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गोरखपुर के सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि जिले में सक्रिय 23 इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) पर एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) मरीजों के प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध है। उच्च बुखार वाले मरीजों की लक्षणों के आधार पर सीएचसी-पीएचसी के स्तर पर ही सात प्रकार की जांचें कराई जानी हैं, जबकि पांच अनिवार्य जांचे जिला स्तर पर कराई जानी हैं।
सीएमओ बृहस्पतिवार को एईएस नियंत्रण विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस साल जनवरी से 30 सितंबर तक हाई ग्रेड फीवर (तेज बुखार) के 1228 मामले रिपोर्ट हुए हैं। इनमें से 57 मामले एईएस के जिले में स्थापित इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) पहुंचे।
एईएस के 102 केस बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इनमें 41 ऐसे थे जो सीधे बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। इसे हर हाल में रोकना है। बताया कि इस दौरान एईएस से 12 मौत हुई है। एईएस के कुल मामलों में से 50 फीसदी से अधिक का कारण स्क्रब टाइफस है।
प्रशिक्षु डॉ. एके देवल ने बताया, अगर बच्चे को झटका नहीं आ रहा है और सिर्फ बेहोशी की स्थिति है, तब भी एईएस हो सकता है। जेई-एईएस कंसल्टेंट डॉ. सिद्धेश्वरी सिंह ने बताया कि दो अलग-अलग बैच में 93 चिकित्सक प्रशिक्षित किए जाएंगे। इससे पहले 150 स्टॉफ नर्स प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। कार्यक्रम में यूनिसेफ की डीएमसी नीलम यादव, हसन फईम, डॉ. एके चौधरी, जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह आदि मौजूद रहे।
एईएस की रोकथाम के सात मंत्र
- नियमित टीकाकरण सत्र में दो साल तक के बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका लगवाएं।
- घरों के आसपास साफ-सफाई रखें ताकि चूहे, मच्छर और छछूंदर से बचाव हो ।
- मच्छर से बचने के लिए पूरी बांह वाली कमीज और पैंट पहनें।
- स्वच्छ पेयजल का सेवन करें।
- आसपास जलभराव न होने दें।
- कुपोषित बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
- खुले में शौच न करें, साबुन से हाथ धोएं, रोजाना स्नान करें।