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सरसों और मेंथा की खेती से संवार रहे तकदीर, जानिए त्रिभुवन ने कैसे की आय दोगुनी

Sun, 29 Nov 2020 04:25 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
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सरसों के खेत में त्रिभुवन। - फोटो : अमर उजाला।
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महराजगंज जिले के जिन खेतों में कल तक दो ही फसल लगाया जाता था। आज उसी खेत में तीन फसल लगाकर किसान ने अपनी आमदनी को बढ़ा लिया। होने वाली आय से घर गृहस्थी की गाड़ी आसानी से चल रही है। निचलौल विकास खंड क्षेत्र के जयश्री निवासी किसान त्रिभुवन उर्फ राजू पटेल ने सीजन के अनुसार बड़े पैमाने पर तीन फसलों का उत्पादन कर विकास की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

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वह सीजन के मुताबिक तकनीकी का प्रयोग कर तीन फसल काटने में महारथ हासिल कर लिए हैं। किसान त्रिभुवन उर्फ राजू पटेल ने स्नातक तक शिक्षा हासिल की इंटरमीडिएट कृषि विषय से हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद नई तकनीकी से कृषि कार्य में जुट गए। इनके पास कुल 11 एकड़ खेती की भूमि है। जिसमें से आठ एकड़ खेती में सरसों की फसल लगा रखे हैं।

उन्होंने बताया कि एक वर्ष में तीन फसलों की कटाई कर आमदनी को दोगुनी कर रहे हैं। धान की कटाई के बाद खेतों को कृषि योग्य बनाते हैं। उसके बाद 15 से 30 अक्तूबर के बीच सरसों की बुआई कर देते हैं। सरसों की फसल लगाने में प्रति एकड़ करीब छह से सात हजार की लागत आती है। जिसमें प्रति एकड़ आठ से नौ क्विंटल सरसों की पैदावार होती है। बाजारों में साढ़े चार हजार से पांच हजार के बीच आसानी से बिक जाती है।
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जनवरी माह के अंतिम में सरसों फसल की कटाई कर मेंथा की फसल लगाने के लिए खेतों को तैयार करते हैं। फरवरी माह में 10 से 25 तारीख के बीच मेंथा की रोपाई कर देते हैं। जो धान की रोपाई से पहले करीब 70 से 90 दिनों के बीच में मेंथा की फसल पक कर तैयार हो जाती है।

मेंथा की खेती में करीब 12 से 15 हजार रुपये की लागत आती है। इसकी पैदावार प्रति एकड़ 50 से 60 किलो होता है। जिसकी कीमत बाजारों में एक हजार से लेकर तीन हजार तक रहता है। इस प्रकार से इनकी आमदनी आम किसानों से प्रतिवर्ष दोगुनी होती रहती है।

 

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मेले में शामिल होने से मिलती है जानकारी

त्रिभुवन ने बताया कि कृषि की नई तकनीकी के बारे में किसान मेले में जानकारी होती है। उन्होंने बताया कि प्रति वर्ष लखनऊ के सगंध एवं औषधिय शोध संस्थान (सीमैप) व कृषि विश्वविद्यालय पंत नगर तथा कृषि विज्ञान केंद्र वसूली फार्म में लगने वाले कृषि मेले में शामिल होते हैं।

खेती के सहारे बच्चों को दिला रहे उच्च शिक्षा
किसान त्रिभुवन का कहना है कि पत्नी संगीता गृहणी हैं। खेती के अलावा आय का कोई साधन नहीं है। खेती कर आमदनी को लगातार दोगुनी कर रहे हैं। खेती के सहारे ही बड़ी बेटी पूजा पटेल को गोरखपुर और लखनऊ से उच्च शिक्षा दिलवा कर बीएड करवाया है। वही छोटा बेटा सूरज बीएसी में पढ़ रहा है।

बसूली फार्म के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विजय चंद्रन ने कहा कि  कृषि विभाग की ओर से भी किसानों को नई तकनीकी से खेती करने के लिए प्रेरित किया जाता है। समय प्रबंधन कर मेंथ, सरसों एवं धान की फसल एक साल में लगाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। जय श्री गांव के किसान से कडी मेहनत कर एक साल में तीन लगाकर अपने आय को बढ़ाने का प्रयास किया है, अन्य किसानो के लिए प्रेरणादायी है।
 
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