आदित्य ने बताया कि हमें ट्रेनिंग पीरियड बताकर गोरखपुर से लखनऊ की ट्रेन में भेजा जाता था। कहा जाता था कि ट्रेन के छूटने और पहुंचने का समय नोट करके लाना है। एक बार टीटीई ने पकड़ लिया तो जालसाज हरेंद्र सिंह ने टीटीई से बातकर छुड़वा दिया।
ऐसे हुआ शक
जालसाजों ने बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से युवकों को फंसाया था। जब वे इनसे मिलते थे तो उसमें रेलकर्मी के अलावा फर्जी विजिलेंस इंस्पेटक्टर भी मौजूद होता था। इससे किसी को पहले शक नहीं हुआ। लेकिन, एक दिन बताया गया कि आपको घर के पते पर रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से एक लेटर भेजा गया है। जब हम लोगों ने घर से मंगवाया तो उसमें ट्रांसफर लेटर था, लेकिन वह लेटर स्टेट गवर्नमेंट की ओर से जारी किया गया था। यहीं से शक बढ़ा तो हमने पूछताछ शुरू की। कहा गया कि कुछ गड़बड़ी हुई है, आप लोग लखनऊ डीआरएम दफ्तर जाएं। वहां एक आदमी मिलेगा वह ठीक करा देगा। उसका मोबाइल नंबर भी दिया गया, लेकिन लखनऊ में वह युवक नहीं आया। दो दिन तक बहानेबाजी बनाता रहा और मोबाइल स्वीच ऑफ कर लिया। फिर हरेंद्र सिंह को हम लोगों ने फोन किया तो उसने कहा कि गोरखपुर आकर मिलें। जब यहां आए तो मोबाइल ऑफ मिला।
इनसे भी हुई है ठगी
- पंकज कुमार सिंह, देवरिया- सूरज कुमार अग्रवाल, पलामू, झारखंड
- राजू कुमार मौर्या, रेनूकोट सोभद्र
- रामकेश विश्वकर्मा, गढ़वा, झारखंड
- चंद्रदीप प्रसाद शाह, प्रभाषनगर हुगली, पश्चिम बंगाल
पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे में नियुक्ति, रोजगार की प्रक्रिया रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (आरआरबी) अथवा रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (आरआरसी) के द्वारा पूर्ण पारदर्शिता के साथ की जाती है। रेलवे में रिक्रूटमेंट से संबंधित सभी जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर तथा रोजगार समाचार पत्र के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। सभी से अपील है कि किसी के झांसे में न आएं तथा फर्जी एवं नक्कालों से बचें। यदि कोई रेलवे में नौकरी दिलाने संबंधी ऑफर देता है तो नजदीकी पुलिस स्टेशन पर शिकायत करें।