डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। कृषि, उद्योग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर का प्रमुख ईंधन होने के कारण इस क्षेत्र की लागत बढ़ रही है जिसका सीधा असर उत्पादों के महंगे होने में नजर आ रहा है। कोरोना काल के दौरान कारोबार मंदा होने और आय के साधन घटने से डीजल पेट्रोल की महंगाई आम जनता की परेशानी का सबब बनी हुई है।
माल ढुलाई महंगी हुई बेकाबू हो रहे दाम
गोरखपुर गुड्स ट्रासंपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष सिंह ने कहा कि डीजल दाम बढ़ने से माल ढुलाई भी महंगी हुई है। ऐसे में सब्जी, दूध, बिल्डिंग मटीरियल खासकर मार्बल और टाइल्स, मौरंग आदि का रेट तेजी से बढ़ रहा है। बाजार में असमंजस की स्थिति है। दिवाली का माहौल है शहर में भीड़ है, सड़कों पर जाम है लेकिन दुकानों पर ग्राहक नहीं हैं। सरकार को चाहिए की महंगाई को काबू करने के लिए बड़े कदम उठाए, अन्यथा ट्रांसपोर्ट सहित बहुत से उद्योग बर्बाद हो जाएंगे।
खेती की लागत बढ़ने से किसान परेशान
किसान यूनियन मंडल अध्यक्ष सतीश ओझा ने कहा कि डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर खेती की लागत पर पड़ा है। पंप से सिंचाई करने में प्रतिघंटा सवा लीटर यानी करीब सवा सौ रुपये प्रतिघंटा का खर्च आ रहा है। किराए पर पंपिंग सेट चलाने वाले किसानों से साढ़े तीन सौ रुपये प्रतिघंटा ले रहे हैं। दौराही का भाव नौ सौ रुपये था अब 1600 रुपये हो गया है। जुताई भी नौ सौ रुपये एकड़ से बढ़कर 1800 रुपये हो चुकी है। 900 रुपये वाली डीएपी भी 1450 रुपये हो गई है। धान रोपनी के लिए महिलाओं ने भी मजदूरी सौ से बढ़ाकर 250 रुपये कर दी है। किसान बिचौलियों को 1200 से 1250 रुपये प्रति क्विंटल में धान बेचने को मजबूर हैं। सरकार किसान विरोधी कानून लागू करने को तुली है, एमएसपी गारंटी लागू नहीं कर रही है।
सब्जियों के दाम दो से तीन गुना तक बढ़े
थोक सब्जी कारोबारी फिरोज अहमद राईन ने कहा कि स्थानीय सब्जी की आवक बंद हो चुकी है, अब टमाटर, गोभी, बोहड़ा, नेनुआ, लौकी, करेला आदि सब्जी बाहर से आ रही है। डीजल के दाम बढ़ने से लागत कई गुना ज्यादा हो चुकी है। यही कारण है कि सब्जियों के थोक दाम दो से तीन गुना बढ़ चुके हैं, फुटकर दाम तो आसमान छू रहे हैं। महंगाई हर जगह दिखाई दे रही है। सब्जी के साथ ही फल, दाल, खाद्य तेल और खाद्यान्न के दाम भी बेकाबू हैं।