जनवरी 2015 में हुए पंचायत चुनाव में 73 जिला पंचायत सदस्य चुने गए थे। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। जनवरी 2016 में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सत्ताधारी दल सपा ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। उस समय सपा की गीतांजलि यादव के मुकाबले गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से तत्कालीन भाजपा विधायक विजय बहादुर यादव के भाई अजय बहादुर चुनाव मैदान में थे।
73 जिला पंचायत सदस्यों में से 34 ने गीतांजलि यादव के पक्ष में मतदान किया था, जबकि अजय बहादुर यादव को 27 मत मिले थे। 11 मतों को अवैध माना गया था। एक सदस्य ने मतदान में भाग नहीं लिया था। सर्वाधिक मत पाकर गीतांजलि यादव विजयी रहीं।
इस चुनाव में यशवंत यादव ने भी जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए दावेदारी पेश की थी, लेकिन उन्हें एक भी मत नहीं मिला था। तब दूसरे प्रत्याशी के भाई व पूर्व विधायक के भाई ने भी प्रदर्शन किया था। धांधली का आरोप लगाया था। अब सपा वही आरोप लगा रही है। साल 2017 में विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष बदले जाने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गीतांजलि अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रहीं।