युवा बोले
भविष्य की चिंता कभी-कभी बहुत परेशान कर देती है। इसके कारण स्वास्थ्य भी प्रभावित होने लगता है। पहले मैं इसे समझ नहीं पाता था और बीमार पड़ता था। अब तनाव होता है मैं बाहर घूमने निकल जाता हूं।
-अरुण पांडेय, रुस्तमपुर।
समय पर काम करने का दबाव बना रहता है। दबाव के कारण तनाव और मानसिक उलझनें होने लगती हैं। जब बहुत परेशान हो जाता हूं तो कुछ देर काम बंद कर दोस्तों से बातचीत करके तनाव कम करता हूं।
-रोमी, कुस्मही बाजार।
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कंपटीशन अब बहुत बढ़ गया है। कम समय में बहुत सारे कार्य करने होते हैं। परिवार भी साथ नहीं रहता है, जिससे कि सब कुछ साझा कर लूं। इसलिए संगीत सुनकर खुद को शांत कर लेती हूं।
-मनीषा मौर्या, गोरखनाथ।
काम की थकान और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताएं परेशान करती हैं। इस कारण सर्वाइकल हो गया था। नियमित योगा करके मैंने खुद की सेहत में सुधार किया है। दिनचर्या नियमित करके हम स्वस्थ रह सकते हैं।
-सृष्टि शुक्ला, बशारतपुर।
डीडीयू एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गिरिजेश कुमार यादव ने कहा कि दबाव की स्थिति में मनोदशा असामान्य हो जाती है। इससे दिनचर्या, मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है। अत्यधिक चिंता व तनाव से बेचैनी और डिप्रेशन होता है। इसलिए खुद को दबाव से मुक्त रखने का प्रयास करें। समस्या को लेकर चिंतित होने की बजाय समाधान खोजना बेहतर विकल्प है।