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डीडीयू : 37 बीएड कॉलेजों को स्थायी संबद्धता का रास्ता साफ

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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध 37 स्ववित्तपोषित बीएड कॉलेजों के लिए अच्छी खबर है। लंबे समय से संबद्धता को लेकर फंसा पेच लगभग समाप्त हो गया है। लीगल ओपिनियन में इन कॉलेजों को स्थायी संबद्धता दिए जाने की संस्तुति की गई है। इसके बाद संबद्धता विभाग को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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डीडीयू से संबद्ध 37 स्ववित्तपोषित बीएड कॉलेज बीते नौ वर्षों से स्थायी संबद्धता का इंतजार कर रहे हैं। संबद्धता से जुड़े मामले में इन कॉलेजों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट से मई 2017 में ही इसका निस्तारण कॉलेजों के पक्ष में कर दिया गया। इसके बाद भी उन्हें डीडीयू की ओर से स्थायी संबद्धता नहीं दी गई।
हर बार निरीक्षण, मानक परीक्षण समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी सिर्फ एक वर्ष का संबद्धता विस्तार देकर उन कॉलेजों का संचालन कराया जा रहा है।
बीएड में प्रवेश के लिए जब अभ्यर्थी जब कॉलेज का चयन करते हैं तो उनके आवंटन पत्र में ‘मामला न्यायालय में विचाराधीन’ लिखा होता है। इस वजह से अभ्यर्थी हिचकते हैं कि प्रवेश के बाद कहीं कॉलेज की संबद्धता न छिन जाए। मामले का हाईकोर्ट से निस्तारण होनेे के बाद भी विचाराधीन दिखने को लेकर कॉलेजों के प्रबंधकों ने इस बार भी विश्वविद्यालय प्रशासन से स्थायी संबद्धता की मांग की थी।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस पर लीगल ओपिनियन का निर्णय लिया था। अब लीगल ओपिनियन आ गया है। इसमें स्थायी संबद्धता की संस्तुति की गई है। इसके बाद संबद्धता विभाग को जल्द से जल्द औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।


प्रभावितों में देवरिया के सर्वाधिक 20 कॉलेज
प्रभावितों में सर्वाधिक 20 बीएड कॉलेज देवरिया जिले में स्थित हैं। गोरखपुर के 12 और कुशीनगर के पांच बीएड कॉलेज भी अस्थायी संबद्धता के भरोसे चल रहे हैं। स्थायी संबद्धता मिलने से छात्रों के मन में इन कॉलेजों में प्रवेश को लेकर आने वाली दुविधा खत्म हो जाएगी।
बोलीं कुलपति
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि कॉलेजों की स्थायी संबद्धता को लेकर लीगल सेल के पास मामला भेजा गया था। लीगल सेल ने स्थायी संबद्धता की संस्तुति की है। संबंधित कॉलेजों को स्थायी संबद्धता के निर्देश दे दिए गए हैं। जल्द ही संबद्धता विभाग सभी औपचारिकताएं पूरी कर लेगा।
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