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उद्यमियों का दर्द: कोरोना ने तोड़ी उद्योगों की कमर, राहत की दरकार

Thu, 24 Jun 2021 12:17 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित वेबिनार में उद्यमियों ने साझा की अपनी परेशानी
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उद्यमियों को सरकार से राहत की दरकार है। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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भले ही कोरोना की दूसरी लहर में सरकार ने उद्योगों को बंद नहीं किया था, लेकिन बाजारों के बंद रहने से औद्योगिक इकाइयों में भी बंदी जैसी ही स्थिति रही। मांग नहीं होने की वजह से उत्पादन आंशिक ही किया गया इसके बावजूद उत्पादित माल गोदाम में ही रखा रह गया। अब बाजार खुलने के बावजूद मांग में बढ़ोतरी नहीं हुई है।
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कर्मचारियों को वेतन देना पड़ रहा है। बिजली का बिल और जीएसटी ने उद्योगों की स्थिति खराब कर दी है। एक तरह से उद्योगों की कमर टूट गई है। उद्यमियों को सरकार से राहत की दरकार है। उद्यमी सरकार की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। उक्त विचार उद्योगपतियों ने अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बुधवार को आयोजित ‘कोरोना काल में उद्योगों की स्थिति व चुनौती’ विषयक वेबिनार में रखा।

हेल्थ और फूड इंडस्ट्री को छोड़कर एमएसएमई सेक्टर की स्थिति अच्छी नहीं है। कोरोना की पहली लहर की मार से उद्योग उबर भी नहीं पाए थे कि दूसरी लहर ने काफी नुकसान पहुंचाया। ऐसे हालात में भले ही सरकार ने उद्योगों को चालू रखने की अनुमति दी थी, लेकिन बाजार को बंद कर दिया था। इससे उत्पादों की बिक्री नहीं हो सकी। आंशिक उत्पादन के बावजूद माल गोदामों में पड़े रहे। वहीं उद्यमियों को बिजली का बिल, अपने वर्करों को सैलरी समेत अन्य कई तरह के खर्चों का वहन करना पड़ा। इसकी भरपाई कैसे की जाए, इसको लेकर सभी उद्यमी अपने-अपने स्तर से मंथन कर रहे हैं। दूसरी सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि बाजार खुलने के बाद भी मांग कम है। तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए अधिकतर उद्यमी अपने पास कुछ पैसे बचाकर रखना चाह रहे हैं, ताकि किसी भी विकट परिस्थिति में इस्तेमाल किया जा सके। लिहाजा उद्यमियों के पास पूंजी का भी संकट है।
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- आरएन सिंह, उपाध्यक्ष, चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज

कोरोना की दूसरी लहर ने उद्योगों की स्थिति दयनीय कर दी है। केंद्र सरकार ने नवंबर तक मुफ्त राशन का प्रावधान किया है। इसकी वजह से बाजार में खाद्य पदार्थों से संबंधित मांग कम हो गई है। किसी भी उद्यमी के लिए इतने दिन तक कच्चा माल या माल तैयार कर स्टॉक रखना संभव नहीं है। सरकार की एक और नीति ने फूड इंडस्ट्रीज को दबाव में ला दिया है। पहली लहर में केंद्र सरकार इंडस्ट्रियों को जो गेहूं बेचती थी, उसमें अलग से माल भाड़ा दिया जाता था, लेकिन इस बार माल भाड़ा की कटौती कर दी गई है। बंगलूरू में जिस रेट से किसी उत्पाद को केंद्र सरकार दे रही है उसी रेट पर लुधियाना में भी मुहैया कराया जा रहा है। इस वजह से बाजार की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। हम अपना उत्पाद किसी अन्य प्रदेश में बेच नहीं पा रहे। कई फोरम पर इस समस्या को उठाया गया है, लेकिन अभी तक कोई बात नहीं बन पाई है।
- आकाश जालान, निदेशक, महाशक्ति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड


कोरोना वायरस की दूसरी लहर में भले ही सरकार ने उद्योगों को संचालित करने की छूट दे रखी थी, लेकिन दिल्ली, कोलकाता, पंजाब, हरियाणा समेत अन्य बड़े बाजारों को बंद रखा था। ऐसे में उद्योगों के सामने उत्पादों की खपत की समस्या बनी रहे। आज भी यह समस्या कमोबेश बनी हुई है। एमएसएमई से संबंधित 50 प्रतिशत उद्योगों के बंद होने की स्थिति हो गई है। इनको जिंदा रखने के लिए सरकार को कई कदम उठाने की आवश्यकता है। अगर उद्योग संचालित होते रहेंगे तो रोजगार के अवसर बने रहेंगे। सरकार को जीएसटी में छूट देने या कोरोना काल के दौरान के टैक्स में छूट देने जैसे कदम उठाने चाहिए। बिजली के रेट में भी कमी करनी चाहिए, ताकि उद्योग अपने घाटे की कुछ भरपाई कर सकें और उद्यमी अपने उद्योगों को चलाने की स्थिति में आ जाएं।
- एसके अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज
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कोरोना की दूसरी लहर में उद्योगों की कमर टूट सी गई है। अब तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में उद्योगों के लिए आने वाला समय चुनौतियों से भरा होगा। उद्यमियों को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ेगी। उत्पादन की मात्रा सीमित दायरे में करनी होगी जिससे अधिक स्टॉक न होने पाये। सरकार ने जिस प्रकार से कोरोना काल में मेडिकल से संबंधित उद्योग लगाने पर कई छूट दी है वैसी ही छूट अन्य उद्योगों को भी देनी चाहिए। ऐसा करने से सभी उद्योगों को संजीवनी मिल सकेगी।
- दीपक कारीवाल, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती गोरखपुर

कोरोना की दूसरी लहर ने मेडिकल ऑक्सीजन गैस की उपयोगिता को बढ़ा दिया है। ऐसे में गैस इंडस्ट्रीज से जुड़े उद्यमियों के सामने कई तरह की चुनौतियां और दबाव हैं। सामान्य दिनों में जहां इंडस्ट्रीयल ऑक्सीजन की मांग रहती है, वहीं कोरोना की दूसरी लहर में मेडिकल ऑक्सीजन की मांग अधिक हो गई थी। गैस इंडस्ट्रीज से जुड़े उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसकी आपूर्ति को लेकर थी। दूसरे प्रदेशों से ऑक्सीजन गैस टैंकर के जरिए मंगवाना पड़ता था। इसे देखते हुए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बरेली के अलावा कुछ अन्य जगहों पर भी ऑक्सीजन उत्पादन करने वाले प्लांट लगाए जा रहे हैं। ऐसे में अगर दुर्भाग्य से कोरोना की तीसरी लहर आ भी जाती है तो पिछली बार की तरह दिक्कतें नहीं पेश आएंगी।
- अजय जायसवाल, निदेशक आरके ऑक्सीजन


ऑक्सीजन गैस के साथ ऑक्सीजन सिलिंडर की संख्या बढ़ाने पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उद्योगों की स्थिति तो बदतर ही है। जनवरी से स्थितियां थोड़ी सामान्य होने के बाद मार्च-अप्रैल तक कुछ पटरी पर आने लगीं थीं, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने सब खराब कर दिया। सबसे अधिक असर पेमेंट पर पड़ा। माल हमेशा क्रेडिट पर बिकता रहा है। पेमेंट दो से तीन माह में आ जाता था, लेकिन अब छह महीने हो चुके हैं, पेमेंट नहीं मिल सका है। ऐसे में उद्योग को संचालित करना संघर्षमय हो गया है। ऐसे में 40 प्रतिशत उत्पादन पर फैक्ट्री को चालू रखा गया। इन सब वजहों से आर्थिक स्थिति डंवाडोल है। अब सरकार से अपेक्षाएं है। पिछले वर्ष सरकार ने काफी राहत दी थी।
- अशोक शॉ, प्रबंध निदेशक, एबीआर पेट्रो प्रोड्क्टस
 
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