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Exclusive: कच्चे माल की कीमतें बढ़ीं, महंगे हुए उत्पाद, उद्यमी-उपभोक्ताओं पर मार

Sun, 29 Nov 2020 11:34 AM IST
vivek shukla राजीव रंजन, गोरखपुर।

सार

  • महंगे कच्चे माल की वजह से बढ़ रही है उत्पादन लागत, जिससे बाजार में घट जा रही मांग
  • स्टील और सरिया के दाम बढ़ने से लोगों के सामने भी मकान और दुकान बनाने का है संकट
  • 12 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है कि सरिया की कीमत 50 रुपये प्रति किलो के ऊपर पहुंची
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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पहले लॉकडाउन और अब कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने उद्यमियों को संकट में डाल दिया है। महंगा कच्चा माल लेकर उत्पादन करने से लागत बढ़ती जा रही है। इस वजह से उत्पादों की बाजार में मांग घट रही है। इस तरह एक तरफ उपभोक्ताओं को जहां महंगा उत्पाद मिल रहा है, वहीं मांग नहीं होने से उद्यमियों को उत्पादन जारी रख पाना मुश्किल हो रहा है।
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कोरोना संक्रमितों की संख्या घटने के बाद उद्यमियों को बेहतर कारोबार की उम्मीद जगी थी, लेकिन कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी ने दूसरी ही चुनौती खड़ी कर दी। 12 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है कि सरिया की कीमत 50 रुपये प्रति किलो के ऊपर पहुंच गई है।

इससे जहां सरिया से बनने वाले उत्पाद महंगे हो गए हैं, वहीं घर-दुकान बनाना भी महंगा हो गया है। इसी तरह एल्युमीनियम, स्क्रैप आयरन, तांबा, ब्रास, जिंक और स्टील के दाम बढ़ने से भी इनसे बनने वाले उत्पाद महंगे हो गए हैं।   
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उद्यमी बताते हैं कि पहले लॉकडाउन और अब आयातित कच्चा माल नहीं आने व भाव बढ़ने से औद्योगिक इकाइयों की उत्पादन क्षमता पर असर पड़ रहा है। आर्थिक बोझ तले दबी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों के सामने सबसे अधिक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
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उद्यमी बताते हैं कि विदेश से कच्चा माल नहीं आ रहा है। इस कारण कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। उद्यमियों के सामने इस बात की भी चुनौती है कि यदि वह अपने उत्पाद की कीमत बढ़ाते हैं तो उसकी मांग घट जाती है, यदि नहीं बढ़ाते हैं तो लागत निकालना मुश्किल हो जाता है।

कई उद्यमियों को तो पहले से सौदा तय होने की वजह से पुरानी कीमत पर ही माल की आपूर्ति करनी पड़ रही है। इस वजह से उन्हें घाटा हो रहा है।

एक महीने में कुछ इस तरह बढ़े भाव (प्रति किलो के हिसाब से)  
कच्चा माल        पूर्व में      अब
एल्युमीनियम       100      130
स्क्रैप आयरन      41         49
तांबा                495        710
ब्रास                370        440
जिंक               190        230  
स्टील               145       160
सरिया              40         51  

वेल्ड इंडिया के निदेशक आरएन सिंह ने बताया कि स्टील और स्पंज आयरन की कीमत में काफी बढ़ोतरी हो गई है। बढ़ोतरी चीन से आयात बंद होने की वजह से हुई है। इसके अलावा कोयले के भाव भी बढ़े हैं। कोयला पहले 41 हजार रुपये टन था, मौजूदा वक्त में 49 हजार रुपये प्रति टन हो गया है। पिछले 12 साल में पहली बार ऐसा हुआ कि सरिया की कीमत 51 रुपये प्रति किलो हो गई है। एक महीने पहले तक सरिया 38-40 रुपये किलो बिका करती थी।

नेशनल इलेक्ट्रिकल के एमडी हरिहर सिंह ने बताया कि मेरी फैक्ट्री में 3000 केवीए तक के ट्रांसफार्मर बनाए जाते हैं। इसके अलावा हरेक तरह के पैनल्स बनाए जाते हैं। इसमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल कॉपर का होता है। कोरोना के पहले जो कॉपर 495 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब 710 रुपये प्रति किलो हो गया है। इस कारण उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो गई है। बड़ी दिक्कत यह है कि कोरोना की वजह से मांग बहुत कम हो गई है। स्थिति यह है कि फैक्ट्री को जिंदा रखने के लिए बिना मुनाफा कारोबार करना पड़ रहा है।
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लक्ष्मी मेटल के एमडी मनोज अग्रवाल ने बताया कि मेरी फैक्ट्री में एल्युमीनियम के उत्पाद बनते हैं। इसके लिए रॉ मेटेरियल और स्क्रैप लोकल के अलावा दिल्ली और कानपुर से मंगाया जाता है। पहले रॉ मेटेरियल 100 से 105 रुपये प्रति किलो मिल जाता था। अब यह 120 रुपये प्रति किलो हो गया है। हमारे सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उत्पादन लागत बढ़ने से माल की कीमत में बढ़ोतरी हो गई है, लेकिन इसकी बिक्री ठप हो गई है। कोरोना की वजह से पहले ही बिक्री कम हो रही थी अब कीमत में बढ़ोतरी की वजह से बिक्री न के बराबर रह गई है।
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