रवींद्र सिंह की हत्या के बाद पड़ी विरासत संभालने की पंरपरा
जिले की सियासत में पति की राजनीतिक विरासत संभालने की परंपरा विधायक रहे रवींद्र सिंह की पत्नी गौरी देवी के आने के बाद पड़ी। 1979 में रवींद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी। गोरखपुर विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके रवींद्र सिंह तेज तर्रार नेता माने जाते थे। 1977 में रवींद्र सिंह कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और करीब 11 हजार मतों से कांग्रेस के अरविंद को पराजित किया।
रवींद्र सिंह की हत्या के बाद उनकी पत्नी गौरी देवी ने राजनीतिक मोर्चा संभाला और जनता पार्टी के बैनर तले चुनावी मैदान में कूद पड़ीं। कांग्रेस के लालचंद निषाद को हराकर निर्वाचित हुई। गौरी देवी 1989 में जनता दल और 1996 में सपा से चुनाव लड़कर सदन में पहुंचने में कामयाब रहीं।
ओमप्रकाश पासवान की हत्या के बाद पत्नी ने रखा राजनीति में कदम
मानीराम के तत्कालीन विधायक ओम प्रकाश पासवान की 25 मार्च 1996 को बांसगांव में चुनावी सभा के दौरान बम मारकर हत्या कर दी गई थी। ओम प्रकाश पिछड़ी बिरादरी के बड़े नेता माने जाते थे। उनकी हत्या के बाद पत्नी सुभावती पासवान ने राजनीति में कदम रखा। करीब 39 हजार मतों के अंतर से चुनाव जीतकर विधायक बनीं। इसी वर्ष सपा ने उन्हें बांसगांव लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बना दिया। सुभावती, भाजपा के राजनरायन पासवान को हराकर सांसद चुनी गईं। अब उनके बड़े बेटे कमलेश पासवान तीन बार से बांसगांव के सांसद और छोटे बेटे डॉ. विमलेश पासवान बांसगांव के विधायक हैं।