बड़ी बात यह कि अफसर भी जान रहे हैं कि इसके बाद मामला बिगड़ सकता है, इस वजह से गश्त के दौरान पुलिस मौके पर जाकर बुजुर्गों का हालचाल भी पूछ रही है, ताकि बेटों के मन में कानून का डर बना रहे।
पुलिस दफ्तर में रोजाना आने वाली शिकायतों पर गौर करें तो हर तीसरा मामला पारिवारिक विवाद का ही सामने आ रहा है। परिवार में आपसी अलगाव के मामले में तेजी से बढ़े हैं। आपस में भाइयों का विवाद तो आम बात हो ही गई है, लेकिन अब लोग अपने ही मां-बाप से दूरी बनाने में लगे हैं। कोई नौकरी के लिए बाहर चला गया है तो मां-बाप को साथ नहीं रखना चाहता हैं तो कई मां-बाप को बोझ समझ कर घर से बेदखल करना चाहते हैं।
बेटों की हरकतों से परेशान होकर मां-बाप भी घर को अपनी गाढ़ी कमाई का बताकर बेटों को ही बेदखल करने का प्रार्थना पत्र दे रहे हैं। इस तरह के मामला लगातार सामने आने पर एसएसपी ने गंभीरता से कार्रवाई का आदेश दिया है।
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केस एक
06 अक्तूबर 2023: गोरखनाथ इलाके के लच्छीपुर में रहने वाले धर्मदेव पांडेय और उनकी पत्नी सुचिता पांडेय ने अपने ही बेटे की आदतों से परेशान होकर केस दर्ज कराया। उन्होंने बेटे से जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की। आरोप है कि शराब के लिए रुपये नहीं देने पर वह मारपीट करता है और जब किराएदार बचाने आते हैं तो उनसे भी उलझ जाता है। गोरखनाथ पुलिस मारपीट और धमकी का केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
केस दो
31 अक्तूबर 2023: पिपराइच थाने में पिता ने अपने बेटे पर केस दर्ज कराया। समस्तपुर मुड़िला निवासी बिकाऊ अली (65) ने बताया कि पांच बेटों ने उन्हें अलग कर दिया है। गुब्बारा बेचकर पेट पालते हैं। अब बड़ा बेटा झिन्नू अली शराब के लिए रुपये मांगता है। रुपये नहीं देने पर मारपीट करता है। पहले तो बेटे ने जबरदस्ती करके घर से निकालने की कोशिश की थी। पुलिस ने उसे बुलाया तो थाने न आकर उसने मारपीट कर दी, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई की।
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केस तीन
एम्स थाना क्षेत्र की 73 वर्ष की शारदा देवी व्हीलचेयर पर चलती हैं। उनका कूल्हा टूट चुका है। शारदा देवी ने पुलिस को प्रार्थनापत्र देकर बताया है कि उनके दो बेटे हैं। दोनों दुकान चलाते हैं। छोटा बेटा सजावट की तो बड़ा बेटा शृंगार की दुकान चलाता है। कुछ वर्ष पहले छोटे बेटे ने मारपीट कर गांव वाले घर से निकाल दिया। मजबूरी में वह बड़े बेटे के साथ रह रही हैं। शारदा देवी ने कहा कि किसी तरह से उन्हें उनके घर में भिजवाइए। ससुराल पहुंचने पर वह पहली बार उसी घर में आई थीं। पुलिस ने उनकी मदद की।
गोरखपुर जिले में 15 हजार 121 बुजुर्ग ऐसे हैं, जिन्हें नया सवेरा योजना के तहत पंजीकृत किया गया है। सरकार की ओर से चलाई जा रही इस योजना में पुलिस को बुजुर्ग का हाल जानना है और उनका कुशलक्षेम भी पूछना है। इसमें से करीब 70 ऐसे बुजुर्ग हैं, जिनकी दवा भी पुलिस पहुंचाती है।
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सभी के बेटे उन्हें छोड़कर परदेस में बस चुके हैं। अधिकतर सरकारी नौकरी में रहे हैं, इस वजह से पेंशन की राशि से खर्च चलाने में तो दिक्कत नहीं आती है, लेकिन रुपयों की मदद से जरूरत का सामान समय से पहुंच जाए, यह एक बड़ी समस्या है। पुलिस भी रोजाना तो नहीं पहुंच पाती, लेकिन चार से पांच दिन में एक चक्कर जरूर मारती है। पहले इसमें भी शिकायत थी कि पुलिस नहीं आती। मगर, एसएसपी ने इसकी भी माॅनीटरिंग के लिए लाइव लोकेशन का सिस्टम बना दिया है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग डॉ. मनीष पांडेय ने कहा कि भारत जैसे अपेक्षाकृत भावनात्मक समाज में मजबूत नातेदारी संबंध पाया जाता है, इसके बाद भी रक्त संबंधी बुजुर्गों के अपने ही बच्चों द्वारा ही बेघर किए जाने की बढ़ती घटनाएं सामूहिक चिंता के विषय हैं। उपभोक्तावादी संस्कृति के तहत बदलते सामाजिक मूल्यों, नई पीढ़ी की सोच में परिवर्तन आने, महंगाई बढ़ने और व्यक्ति के अपने बच्चों और पत्नी तक सीमित हो जाने की प्रवृत्ति के कारण बड़े-बूढ़ों की समस्याएं बढ़ रही हैं। प्रायः समाज के मूल्य आर्थिक नीतियों से तय होते हैं और वर्तमान आर्थिक संरचना के कारण अतिशय व्यक्तिवादिता की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिसमें सामाजिक और भावनात्मक संबंध कमजोर हो रहे हैं। सामयिक सामाजिक परिस्थितियां बाजार की शक्ति के समक्ष असहाय होती जा रहीं, फिर भी बच्चों को बचपन से ही स्कूलों व घरों में बड़े-बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील रहने की शिक्षा देकर उनमें नैतिक मूल्यों का विकास किया जाए और इसी अनुरूप समाजीकरण करना होगा।
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एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि जनसुनवाई में पारिवारिक विवाद के मामले बढ़े हैं। बुजुर्ग मां-बाप को घर से निकाले जाने के मामलों में गंभीरता से कार्रवाई का आदेश दिया गया है। पुलिस बेटों को कानून समझा रही है और जिन मामलों में मारपीट होती है, उसमें केस दर्ज कर कार्रवाई करती है। पुलिस वालों को निर्देशित किया गया है कि वह गश्त के दौरान भी प्रार्थना पत्र देने वालों का हालचाल लें, ताकि उनके साथ कोई अप्रिय घटना न होने पाए।