शुक्रवार को हल्की बूंदाबांदी की वजह से दिन का पारा बृहस्पतिवार की तुलना में करीब आठ डिग्री लुढ़क गया। अधिकतम तापमान 28 डिग्री दर्ज किया गया जो कि सामान्य से करीब सात डिग्री कम रहा। इसी वजह से पूरे दिन हल्की ठंड बनी रही। दोपहर बाद बादल छंटने के बावजूद शाम को सिहरन महसूस होती रही।
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आज और कल भी हल्की बूंदाबांदी के आसार
उत्तरी मध्यप्रदेश के ऊपर चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। इसके अलावा उत्तरी हिमालय पर भी एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसकी वजह से जिले के करीब 50 प्रतिशत इलाकों के ऊपर बादल छाए हुए हैं। शुक्रवार को भी इसी वजह से बारिश हुई। मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि इस सिस्टम की वजह से शनिवार और रविवार को भी हल्की बूंदाबांदी की संभावना है।
शुक्रवार को जिले के दक्षिणी इलाके बांसगांव, बड़हलगंज, खजनी, गोला, गगहा, कौड़ीराम, सिकरीगंज आदि स्थानों पर अन्य इलाकों की तुलना में ज्यादा बूंदाबांदी हुई। बारिश की वजह से गगहा इलाके के कुछ क्षेत्रों में गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। गगहा क्षेत्र के डांगीपार भाटपार इलाके में बारिश से खेतों में पक कर तैयार खड़ी गेहूं की फसल गिर गई। गोला में किसान फसल समेटने में जुटे रहे।
किसानों ने कहा कि अगर एक दो दिन और बूंदाबांदी हो जाएगी तो फसल को ज्यादा नुकसान होगा। बेलघाट के किसान धर्मज्ञान दुबे, राजाराम मौर्य, रामललित यादव आदि ने कहा कि पहले हुई बारिश में दलहल और तिलहन फसल को नुकसान हुआ था, अगर कुछ दिन और बूंदाबांदी होती है तो गेहूं की फसल को भी नुकसान होगा। जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अगर तेज हवाओं के साथ बारिश होती है तो गेहूं के अलावा दलहन और तिहलन की फसलों को नुकसान होता है। लेकिन जितनी बूंदाबांदी हुई है उससे बहुत ज्यादा नुकसान की आशंका नहीं है। हालांकि गेहूं के काले पड़ने की आशंका है।
जिले में करीब 78 लाख क्विंटल गेहूं की पैदावार
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब दो लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की जाती है। तकरीबन 78 लाख क्विंटल गेहूं की पैदावार होती है। कृषि वैज्ञानिक अजय सिंह का कहना है कि सामान्य तौर पर मार्च के अंतिम सप्ताह में गेहूं की फसल कटनी शुरू हो जाती है। ऐसे में इन दिनों में होने वाली बारिश से गेहूं की फसल के खराब होने की आशंका बनी रहती है। अगर ज्यादा बारिश हो जाए तो गेहूं के दाने काले पड़ जाते हैं। वहीं, तेज हवाओं की वजह से गेहूं के पौधे गिरने से भी फसलों के काफी नुकसान होने की आशंका रहती है।