राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की टीम ने शनिवार की रात कुशीनगर-गोरखपुर फोरलेन पर जगदीशपुर के पास गुवाहाटी से तस्करी कर दिल्ली जा रही सिगरेट की बड़ी खेप पकड़ी। युवाओं की तबाही के लिए लाई गई इस विदेशी कोरिया निर्मित सिगरेट के 10 हजार पैकेट एक बांस लदे ट्रक में छिपाया गए थे, जिसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है।
टीम ने ट्रक को कब्जे में लेकर चालक और एक अन्य को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया है। गिरफ्तार दोनों आरोपी पश्चिमी यूपी के बताए जा रहे हैं।जांच एजेंसी को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि सिगरेट की अवैध खेप असम और म्यांमार से लाकर यूपी और दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में खपाया जा रहा है।
सूत्रों की सूचना पर दिल्ली और लखनऊ की संयुक्त टीमें पिछले शनिवार से ही रेकी कर रही थीं। इस बीच डीआरआई की टीम को सूचना मिली कि गोरखपुर के रास्ते तस्करी कर सिगरेट की बड़ी खेप ले जाई जा रही है। गोपालगंज होते हुए ट्रक गोरखपुर होकर दिल्ली की तरफ जाने वाला है।
सूचना पर जांच एजेंसी की टीमें ट्रक के पीछे लगी थीं। सूत्रों की मानें तो चकमा देने के लिए तस्करों ने गोपालगंज से गोरखपुर आते समय ट्रक का नंबर भी बदल दिया था। ट्रक पश्चिमी उत्तर प्रदेश का था और उस पर हरियाणा का नंबर लगा दिया।
अवैध कारोबार पर अंकुश के ये हैं प्रावधान
सिगरेट के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने और तंबाकू उत्पादों के प्रति बढ़ रहे प्रचलन को कम करने के मकसद से वर्ष 2003 में सिगरेट एंड अदर टोबेको प्रोडक्ट एक्ट (कोटपा) लागू किया गया था। इसके तहत देश में तंबाकू उत्पाद बेचने के लिए उसके पैकेट पर हिंदी व अंग्रेजी में वॉर्निंग के साथ ही उस पर कैंसर दर्शाता हुआ फोटो होना अनिवार्य है। विदेशी सिगरेट पर ये भारतीय प्रतिबंध और नियमों को दरकिनार कर सिगरेट तैयार किया जाता है और दिल्ली के अलावा अन्य जगह खपाए जाते हैं।
उड़ रही हैं नियमों की धज्जियां, जिम्मेदार बेफिक्र
सिगरेट पर करीब 50 प्रतिशत टैक्स लगता है। इसके लिए पैकेट पर प्रिंट रेट होना जरूरी है, लेकिन विदेशी ब्रांड की सिगरेट पर कोई रेट नहीं होता। मनमाने तरीके से बेचने के साथ ही टैक्स की पूरी तरह से चोरी होती है। इसके अलावा कोटपा एक्ट के तहत किसी भी ब्रांड पर वॉर्निंग या फोटो नहीं दिया जा रहा है।