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#LadengeCoronaSe: कोरोना की दोनों लहर में हुए पॉजिटिव, घर पर किया इलाज हो गए निगेटिव

Mon, 10 May 2021 03:45 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

वैक्सीन की दोनों डोज लगवाई थी, नहीं हुई अधिक परेशानी, होम आइसोलेशन में रहकर कोरोना को हराया, मरीजों की सेवा में जुटे डॉ. मनोज
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होम आइसोलेशन में रहकर महामारी को दी मात। - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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गोरखपुर के डॉ. मनोज कुमार मिश्र कोरोना की दोनों लहरों में संक्रमित हो गए और होम आइसोलेशन में रहकर महामारी को हराया। एक बार फिर वे कोविड मरीजों की सेवा में जुट गए हैं। उन्हें अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ी और न ही ऑक्सीजन के लिए लंबी कतार लगानी पड़ी। डॉ. मनोज चरगांवा ब्लॉक के रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) के चिकित्सा अधिकारी हैं। उन्होंने वैक्सीन की दोनों ही डोज लगवाई थी लिहाजा उन्हें अधिक परेशानी नहीं हुई।

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पिछले साल अगस्त के आखिरी सप्ताह में डॉ. मनोज को बुखार हुआ। एक-दो दिन बुखार की दवा लेने के बाद भी जब हालत नहीं सुधरी तो उन्होंने कोविड जांच करवाई। अगस्त की 31 तारीख को जांच रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हो गई। शरीर में दर्द के अलावा सांस फूलने की भी दिक्कत उन्हें महसूस होने लगी। ऑक्सीजन लेवल 90 से ऊपर था और सीने में सिर्फ दर्द था इसलिए डॉ. मनोज ने होम आइसोलेशन का विकल्प चुना।

15 सितंबर 2020 को उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ गयी। कोरोना को झेल चुके डॉ. मनोज ने जैसे ही टीकाकरण शुरू हुआ, आगे बढ़ कर कोविड का टीका लगवा लिया। मार्च 2021 तक टीके की दोनों खुराक पूरी कर लीं। वह कहते हैं कि टीके की दोनों डोज लेने के बाद उनमें काफी आत्मविश्वास आ गया।
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खानपान और नींद पर दिया ध्यान

हालांकि किसी न किसी चूक के कारण वह 14 अप्रैल 2021 को दोबारा कोरोना की जद में आ गये। एंटीजन रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन इस बार सांस फूलने की दिक्कत नहीं थी। सीने में दर्द और बुखार था। एक बार कोविड का अनुभव और टीकाकरण के प्रति विश्वास के कारण उन्होंने फिर से होम आइसोलेशन का ही विकल्प चुना। सतर्कता से घर पर ही इलाज लिया और ठीक हो गये।

डॉ. मिश्र ने बताया कि होम आइसोलेशन के दौरान वह सुबह काढ़ा और पपीता, संतरा और नाशपाती जैसे फलों का सेवन करते थे। दोपहर में दाल, रोटी और सब्जी के साथ हरे सलाद का सेवन किया। दिन में दो-तीन घंटे की अच्छी नींद ली। सुबह-शाम योग और प्राणायाम किया। रात में हल्दी दूध का सेवन करते थे।

इसके अलावा दवा का सेवन समय से किया और ऑक्सीजन का स्तर हमेशा चेक करते रहे। आत्मबल को कभी कमजोर नहीं होने दिया और यह विश्वास रखा कि उन्हें टीके की दोनों डोज लग चुकी है और वे जरूर स्वस्थ हो जाएंगे। इस तरह 22 अप्रैल को उनकी एंटीजन रिपोर्ट निगेटिव हो गई। 24 अप्रैल को उनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट भी निगेटिव आई थी।
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