अस्पताल के पंजीकरण के दौरान जिस डॉक्टर का नाम रहता है, वह शपथ पत्र देता है। शपथ पत्र में इस बात का जिक्र रहता है कि वह अस्पताल में बैठेगा और मरीजों का इलाज करेगा। इसके अलावा इमरजेंसी में किसी भी समय इलाज के लिए उपलब्ध रहेगा। लेकिन शपथ पत्र देने के बाद भी बड़ी संख्या में डॉक्टर अपने नाम से पंजीकृत अस्पतालों में नहीं बैठ रहे हैं।
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सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने कहा कि अस्पताल के पंजीकरण के दौरान डॉक्टर को मौके पर बुलाया जा रहा है। शपथ पत्र भी लिया जा रहा है। सख्त हिदायत दी गई है कि लोग अपने नाम से पंजीकृत अस्पतालों में जरूर बैठें। अगर जांच के दौरान डॉक्टर नहीं मिलते हैं, तो ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली में रहकर पीजी की कर रहा था तैयारी, यहां लगी थी डिग्री
भटहट स्थित सत्यम हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन मुन्ना भाई ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ. सुनील के नाम से कराया था। गर्भवती की मौत के बाद जब मामले की जांच शुरू हुई तो पता चला कि डॉ. सुनील दिल्ली में रहकर पीजी की तैयारी में जुटे हैं। इसी के आधार पर पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
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केस-दो
पूर्व सीएमओ के नाम से कर दिया था आवेदन
शहर के तारामंडल के रहने वाले एक मुन्ना भाई ने तो लखनऊ में रहने वाले एक पूर्व सीएमओ के नाम से ही रजिस्ट्रेशन के लिए फाइल स्वास्थ्य विभाग में भेजी थी। विभाग ने जब फाइल पर पूर्व सीएमओ का नाम देखा, तो जांच शुरू की। पता चला उन्होंने अपना नाम नहीं दिया था। पूर्व सीएमओ ने रजिस्ट्रेशन कराने से मना कर दिया। इसके बाद विभाग ने अस्पताल का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया।