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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस: खुद के लिए तलाश रहे मौत, कर रहे मरने की तैयारी, तो जाएं डॉक्टर के पास-जानें क्यों

Tue, 10 Sep 2024 02:02 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

विशेषज्ञ करते हैं कि आत्महत्या के विचार अचानक नहीं आते हैं। तनाव, उदासी, किसी बात को लेकर पछतावा, चिंता सहित अन्य बातें पहले व्यक्ति के आत्मबल को तोड़ती हैं, फिर मनोभाव को आत्महत्या के प्रसायों की तरफ ले जाती हैं। व्यक्ति छत से कूदने, जहर खाने, नश काटने सहित अन्य प्रयासों को अपनाने के बारे में सोचने लगता है।
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आत्महत्या रोकथाम दिवस - फोटो : फ्रीपिक डॉट कॉम
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विस्तार
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किसी बात को लेकर प्राय: मन में उदासी, तनाव और गलत विचार आने लगते हैं। अगर ये विचार दो चार दिन में बदल जाएं तो ठीक, लेकिन यदि लगातार पंद्रह दिन तक आप ऐसे ही परेशान हो रहे हैं तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। यही नहीं स्वयं के साथ आसपास भी कोई व्यक्ति, परिवार के किसी सदस्य के व्यवहार में पंद्रह दिनों तक परिवर्तन दिखे तो उसकी मदद करें। टेलीमानस अथवा मनकक्ष के नंबर पर संपर्क कर समस्या को शेयर करें।
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विशेषज्ञ करते हैं कि आत्महत्या के विचार अचानक नहीं आते हैं। तनाव, उदासी, किसी बात को लेकर पछतावा, चिंता सहित अन्य बातें पहले व्यक्ति के आत्मबल को तोड़ती हैं, फिर मनोभाव को आत्महत्या के प्रसायों की तरफ ले जाती हैं। व्यक्ति छत से कूदने, जहर खाने, नश काटने सहित अन्य प्रयासों को अपनाने के बारे में सोचने लगता है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एसआर डॉ. विशाल गौतम बताते हैं कि टेलीमानस पर तनाव और अवसाद को लेकर दिन में 150 से 200 कॉल आती हैं। जिसमें से 10 से 15 आत्महत्या के केस रहते हैं। आत्महत्या के कारणों को जानने के साथ दवा और काउंसिलिंग के माध्यम से व्यक्ति के विचारों को बदला जाता है।
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आत्महत्या रोकथाम दिवस 2024 - फोटो : freepik.com
हम तब तक व्यक्तियों की मदद करते हैं, जब तक उसके मन से आत्महत्या के विचार समाप्त नहीं हो जाते हैं। जिला अस्पताल के नैदानिक मनोवैज्ञानिक मनकक्ष के मनोचिकित्सक रमेंद्र त्रिपाठी कहते हैं कि आने वाले रोगियों से बात करके पहले अपनापन का व्यवहार बनाने की जरूरत होती है।

तभी कोई व्यक्ति अपने विचार साझा कर सकता है। काउंसिलिंग के दौरान व्यक्ति की गोपनीयता सबसे प्रमुख रहती है। काउंसिलिंग में छह माह तक का समय लग सकता है। पहले रोगी के मन से उन ख्यालों को निकालने के बाद उसमें जीने की नई ऊर्जा का संचार करना पड़ता है। इसके साथ ही परिवार के प्यार और अपनेपन से भी रोगी जल्दी ठीक होते हैं।

बीआरडी मेडिकल कालेज के टेलीमानस नोडल अधिकारी डॉ. आमिल हयात खान ने बताया कि मन में किसी बात को लेकर उदासी आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण है। दुनिया में हर समस्या का हल मिल सकता है, लेकिन आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है।

लगातार पंद्रह दिन तक एक ही बात दिमाग में रहने से व्यक्ति तनाव और फिर आत्महत्या की तरफ बढ़ने लगता है। अपनी बातों और परेशानियों को साझा नहीं कर पाने से व्यक्ति अवसाद में चला जाता है। परिवार के लोगों को ऐसे सदस्यों को प्यार से समझाना, उसने अधिक बातचीत का प्रयास करने की कोशिश करनी चाहिए।

आत्महत्या रोकथाम के उपाय - फोटो : freepik.com
केस एक : 18 वर्षीय स्नातक छात्रा मां की असमय मौत और कॉलेज में शिक्षक के गलत व्यवहार से तनाव में रहने लगी। उसने पढ़ाई भी छोड़ दी। किसी से अपनी परेशानी कहने की जगह आत्महत्या के बारे में सोचने लगी। तीन बार प्रयास भी किया। टेलीमानस के नंबर पर कॉल कर परेशानी का हल मांगा। छह माह की काउंसिलिंग के बाद छात्रा स्वस्थ है।

केस दो : अभिभावकों की डांट और उलाहना से परेशान खजनी के युवक ने फोन कर पुल से कूदकर आत्महत्या के बारे में बताया। फाेन पर काउंसलर ने युवक से एक घंटे तक बात कर उसकी परेशानी जानने की कोशिश की। उसके विचार को भटकाकर किसी तरह बातचीत कर उसके अभिभावक से संपर्क किया।

केस तीन : चौरीचौरा के एक शिक्षक का बेटा परिवार द्वारा नीट की तैयारी कर डॉक्टर बनने के दवाब से परेशान था। वह आत्महत्या के बारे में सोच रहा था। किताबों में सुसाइड नोट तक लिखकर रखा था। बहन के उस नोट को पिता को दिखाने के बाद मनकक्ष में बातकर सलाह मांगी। मनोचिकित्सक ने बेटे को सुबह अस्पताल लेकर आने के साथ उसपर निगरानी रखने को कहा।

केस चार : 55 साल के सहजनवा के एक व्यापारी, व्यापार में नुकसान हो जाने के कारण अवसाद में रहने लगे। कुछ दिनों में आत्महत्या के प्रयास भी करने लगे। दो बार प्रयास के बाद सफल नहीं हाेने पर एक दिन सलाह के लिए मनकक्ष में फोन किया। कुछ दिन फोन पर बातचीत कर मनोचिकित्सक ने उनके मनोभाव को बदलकर मन से आत्महत्या के विचार को निकाला।

आत्महत्या के कुछ सामान्य कारण

अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं
तनाव और दबाव
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज - फोटो : सोशल मीडिया
अकेलापन और सामाजिक अलगाव
नशीली दवाओं का सेवन

आर्थिक और वित्तीय समस्याएं
आत्महत्या से बचाव के लिए कुछ सुझाव

किसी व्यक्ति के आत्महत्या के बारे में बात करते सुनें तो तुरंत ध्यान दें और मदद करें
मानसिक स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात करें और इसके बारे में जागरूकता बढ़ाएं

ऐसे लोगों को अकेला न छोड़ें
आत्महत्या के बार-बार आ रहे ख्याल तो तुरंत मदद लें

कैसे प्राप्त करें मदद
जिला अस्पताल स्थित मनकक्ष का मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर 9336929266 है। बीआरडी मेडिकल कालेज में टेलीमानस केंद्र का हेल्पलाइन नंबर 14416 है, यह हफ्ते के सात दिन 24 घंटे काम करता है। इसपर कॉल कर अपनी मानसिक समस्या को बताकर हल प्राप्त कर सकते हैं। यहां नाम और पहचान बताए बिना समस्या बता सकते हैं।
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