देश के सभी रेलवे के अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा बंद हो सकती है। मरीजों को अनुबंध वाले अस्पतालों में भेजा जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। रेलवे बोर्ड ने देश के सभी प्रमुख मुख्य चिकित्सा निदेशक को पत्र लिखकर पिछले दो वर्षों में कराए गए डायलिसिस के संबंध में विवरण मांगा है।
रेलवे बोर्ड के स्वास्थ्य निदेशक आरएस शुक्ला ने 10 नवंबर को जारी पत्र में कहा है कि डायलिसिस में खर्च का विश्लेषण किया जाएगा, ताकि पता लग सके कि रेलवे अस्पताल और प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने में कितना खर्च आएगा, रेलवे को इससे कितनी बचत हो सकती है।
इसके लिए उन्होंने वर्ष 2018-19 व 2019-20 में रेलवे के अस्पतालों में कितने डायलिसिस किए गए, डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टॉफ का ब्योरा, बिजली, डायलिसिस किट सहित अन्य खर्चों का विवरण मांगा है। इसके अलावा दूसरे अस्पतालों में रेफर किए गए मामलों में कितना खर्च आया है, इसका भी विवरण 17 नवंबर तक मांगा है। इस विवरण से पता लगाया जाएगा कि अगर प्राइवेट अस्पताल में यह सुविधा ली जाए तो रेलवे को कितनी बचत होगी।