नवनियुक्त डीजीपी मुकुल गोयल गोरखपुर में 1997 में एसएसपी रह चुके हैं। उस दौर में अपराध चरम पर था और गैंगवार के साथ ही लूट, डकैती की घटनाएं आए दिन होती थी। तब मुकुल गोयल ने बड़ी खामोशी से कार्यशैली बदली और नौ महीने में आठ एनकाउंटर हुए। इससे अपराधियों के बीच पुलिस की दहशत कायम हो गई। उस समय, डकैती और लूट में बड़ा नाम बन चुके राधे और जैस, गोरखनाथ इलाके में हुए एनकाउंटर में मारे गए थे।
गोरखपुर जिले में एसएसपी के तौर पर इनका कार्यकाल करीब 9 महीने का था। कार्यभार संभालने के 16वें दिन ही जैतपुर के पास एनकाउंटर में एक बदमाश मारा गया। इसके बाद अपराधियों पर ताबड़तोड़ मुकदमे दर्ज होने के साथ ही पुलिस की दबिश बढ़ने लगी। बदमाश भाग कर दूसरे जिलों के शरण में गए तो पुलिस ने खोज कर या तो जेल के पीछे भेजा। जिसने भी पुलिस पर गोली चलाई वह मारा गाया।
हालात यह हुए कि उस समय के जितने बड़े बदमाश थे, वे पुलिस की गोली के निशाना बने और अपराधियों के बीच पुलिस की एक नई धमक बन गई। अपराधियों को उस समय सत्ता या किसी ताकतवर का शरण नहीं मिल पा रही थी।