गोरखपुर के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) अविनाश कुमार का प्रयागराज से गोरखपुर का सफर शुक्रवार को यादगार पल के रूप में दर्ज हो गया। सफर के बीच मोबाइलफोन की बजी घंटी ने उन्हें ऐसी खुशी दे दी, जिसे ताउम्र भूल नहीं पाएंगे। उन्हें बताया गया कि उनका चयन आईपीएस (इंडियन पुलिस सर्विस) के लिए हो गया है। अविनाश कुमार पिछले दो साल से गोरखपुर में डीएफओ के पद पर कार्यरत हैं। अविनाश को तीसरे प्रयास में सफलता मिली है। वह आईआईटी रुड़की से जूलोजिकल इंजीनियरिंग में बीटेक कर चुके हैं।
अविनाश कुमार मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले स्थित गोह गांव के निवासी हैं। प्रारंभिक शिक्षा गांव में करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर चले आए। इस बीच उन्होंने आईएएस की तैयारी शुरू की। लेकिन उनका चयन वन विभाग में बतौर डीएफओ के पद पर हो गया। इन सबके बीच उन्होंने हार नहीं मानी। नौकरी के साथ-साथ आईएएस की तैयारी में जुटे रहे।
अविनाश ने बताया कि दिनभर ऑफिस का काम करने के बाद घर जाकर तैयारी करता था। पढ़ाई के वक्त पत्नी डॉ आकांक्षा का पूरा साथ मिला जिससे कभी व्यवधान नहीं आए। परिवार में दो बड़े भाई हैं। दोनों अभियंता के पद पर तैनात हैं। पिता मोहन सिंह लोक निर्माण विभाग में अवर अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि मां माधुरी सिंह गृहिणी हैं।
परिवार का सपना था आईएएस या आईपीएस बनना
अविनाश बताते हैं कि परिवार के लोगों ने एक सपना संजोया था कि बेटा एक न एक दिन आईएएस या आईपीएस जरूर बनेगा। आज यह हकीकत में बदल गया है। हर कदम पर परिजनों का पूरा सहयोग रहा। स्थिति ऐसी हो गई थी कि डीएफओ की नौकरी और पढ़ाई के बीच पिछले कुछ सालों से पारिवारिक समारोह में शामिल नहीं हो सका। लेकिन इसके बाद भी परिवार के लोगों ने कभी कोई सवाल नहीं किया।