तरकुलवा। पुत्रों के दीर्घायु व सुख-समृद्धि के उद्देश्य से रविवार को माताओं ने हलषष्ठी व्रत का उपवास रखा। पारंपरिक रीति-रिवाज से माताओं ने कुश का पूजन-अर्चन कर मांगलिक आशीर्वाद ग्रहण किया। क्षेत्र के मंदिरों में महिलाओं की काफी भीड़ भी देखी गई। इस बीच नवविवाहिताओं ने भी व्रत रखकर पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद मांगा।
रविवार सुबह महिलाओं ने महुआ का दातून करने के बाद स्नान कर दही से अपना बाल धुला। इसके बाद वह पूजन थाल में महुआ का पत्ता, महुआ, चना, तिन्नी का चावल, कुश और पीला वस्त्र लेकर पूजा के स्थान पर पहुंचीं। इसके बाद महिलाओं ने कुश और महुआ के डंठल को जमीन में लगाकर उसके नीचे चना और महुआ चढ़ाया। तत्पश्चात महिलाओं ने कुश में गांठ लगाकर उसके ऊपर पीला वस्त्र डालकर अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामना कीं। पूजन के बाद महिलाओं ने अलग-अलग समूह में कथा सुनाई। पूजा समाप्त होने पर घर पहुंचने के बाद बिना हल चलाए गए जमीन पर पैदा किए गए चौराई का साग और तिन्नी का चावल बनाकर व्रती महिलाओं ने व्रत पूरा किया।
पूर्व प्रधान मीना राव, प्रधान उषा देवी, प्रभावती देवी, पूनम, नीतू देवी, विमलावती देवी आदि ने बताया कि इस पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन सभी महिलाएं अपने पुत्रों के दीर्घायु और पुत्र प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।