गोरखपुर जिले में बारिश और बाढ़ का प्रकोप कम होने के बाद डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है। जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में डेंगू के तीन मरीज आए हैं जबकि निजी अस्पतालों में डेंगू के लक्षण वाले मरीजों की संख्या पचास से अधिक पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के लिए जरूरी इंतजाम कर रहे हैं।
तराई क्षेत्र में होने के कारण गोरखपुर सहित आसपास के जनपदों में मच्छरों का प्रकोप रहता है। इस बार बारिश भी सामान्य से अधिक होने के कारण डेढ़ सौ से ज्यादा गांव बाढ़ग्रस्त हुए। शहर में भी कई मोहल्ले जलभराव की समस्या ग्रस्त हैं। बाढ़ का प्रकोप घटने के बाद अब ग्रामीण और जलभराव वाले शहरी इलाकों में डेंगू-मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस सीजन अभी तक डेंगू के तीन मरीज मिल चुके हैं। यदि निजी अस्पतालों के आंकड़ों भी जोड़ा जाए तो जनपद में अब तक डेंगू और मलेरिया के लक्षण वाले पचास से अधिक मरीज मिल चुके हैं। अस्पतालों में ठंड लगने के साथ अचानक तेज बुखार, तेज ठंड महसूस होने के साथ निश्चित समय पर बुखार चढ़ने, सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द वाली शिकायत के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉ. एसएस शाही के अनुसार यह डेंगू और मलेरिया के लक्षण हैं। इलाज के साथ ही जरूरी है कि घर और आसपास साफ सफाई रखी जाए ताकि डेंगू-मलेरिया पैदा करने वाले मच्छर पनप नहीं सकें।
सीएमओ गोरखपुर डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि संक्रामक रोग, डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के लिए ग्रामीण और शहरी इलाकों में लगातार छिड़काव कराया जा रहा है। मलेरिया विभाग की टीमें भी अभी तक छह हजार से अधिक लोगों की स्लाइड बना कर जांच कर चुकी हैं। जिले में मलेरिया-डेंगू से निपटने के लिए सभी आवश्यक औषधियां पर्याप्त मात्रा में हैं।
क्या है डेंगू बुखार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओर से डेंगू पर जारी जानकारी के मुताबिक डेंगू बुखार एक आम संचारी रोग है। इसकी मुख्य लक्षण तीव्र बुखार, अत्यधिक शरीर दर्द तथा सिर दर्द है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसे समय-समय पर महामारी के रूप में देखा जाता है। वयस्कों के मुकाबले बच्चों में इस बीमारी की तीव्रता अधिक होती है।
शरीर व जोड़ों में होता है तेज दर्द
यह बुखार डेंगू वायरस (विषाणु) से होता है। इसके चार प्रकार (टाइप 1,2,3 और 4) हैं। आम भाषा में इस बीमारी को हड्डी तोड़ बुखार कहा जाता है क्योंकि इसके कारण शरीर व जोड़ों में बहुत दर्द होता है।
एडीज मच्छर के काटने से होती है डेंगू
मलेरिया की तरह डेंगू बुखार भी मच्छरों के काटने से फैलता है। इन मच्छरों को ‘एडीज मच्छर’ कहते हैं जो काफी ढीठ होते हैं। ये मच्छर दिन में भी काटते हैं। भारत में यह बीमारी बरसात के मौसम में तथा उसके तुरंत बाद के महीनों (अर्थात जुलाई से अक्तूबर) में सबसे अधिक होता है। डेंगू बुखार से पीड़ित रोगी के रक्त में डेंगू वायरस बहुत अधिक मात्रा में होता है। जब कोई एडीज मच्छर डेंगू के किसी रोगी को काटता है तो वह उस रोगी का खून चूसता है। खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर में प्रवेश कर जाता है। मच्छर के शरीर मे डेंगू वायरस का कुछ और दिनों तक विकास होता है। जब डेंगू वायरस युक्त मच्छर किसी अन्य स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो वह डेंगू वायरस को उस व्यक्ति के शरीर में पहुंचा देता है। इस प्रकार वह व्यक्ति डेंगू वायरस से संक्रमित हो जाता है तथा कुछ दिनों के बाद उसमें डेंगू बुखार रोग के लक्षण प्रकट हो सकते हैं। जिस दिन डेंगू वायरस से संक्रमित कोई मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो उसके लगभग 3-5 दिनों बाद ऐसे व्यक्ति में डेंगू बुखार के लक्षण प्रकट हो सकते हैं। यह संक्रामक काल 3-10 दिनों तक हो सकता है।