गोरखपुर जिले की सभी सीलिंग और नजूल की जमीनों का डाटा रजिस्ट्री कार्यालय में फीड होगा। प्रशासन का दावा है कि ऐसा होने से कोई भू-माफिया उस जमीन को अपना बताकर रजिस्ट्री नहीं करा सकेगा। जब भी कोई रजिस्ट्री कराने पहुंचेगा तो सिस्टम पर बैठा कर्मचारी डीड में लिखे राजस्व ग्राम और खाता संख्या से जमीन की वास्तविक स्थिति चेक कर लेगा। अगर जमीन सीलिंग या नजूल की हुई तो रजिस्ट्री नहीं होगी। डीएम के निर्देश पर ऐसी जमीनों की सूची बनाने का काम शुरू हो गया है।
दरअसल दाउदपुर के रहने वाले श्याम सिंह ने बहरामपुर में जमीन ली थी। जब इनके जमीन का खारिज-दाखिल नहीं हुआ तो उन्होंने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की। डीएम ने जब इसकी पड़ताल कराई तो पता चला कि वहां श्याम सिंह की तरह कई लोग नजूल की जमीन पर रजिस्ट्री करा चुके हैं। सरकारी जमीन होने के नाते उन जमीनों का नामांतरण नहीं हो सकता है। तिवारीपुर क्षेत्र के बहरामपुर में दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन कब्जा करने का खेल करीब दो दशक से चल रहा है।
सीलिंग की जमीन बेचने पर हाल में ही हुआ है मुकदमा
हाल ही में फर्जी दस्तावेज के सहारे महादेव झारखंडी के पास सीलिंग की करीब 25 एकड़ जमीन बेचने के मामले में कैंट पुलिस ने कॉलोनाइजर सहित छह लोगों पर धोखाधड़ी, लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया है। सीलिंग की जमीन बेचे जाने के मामले में राजस्व महकमा व रजिस्ट्री कार्यालय भी सवालों के घेरे में है।
डीएम विजय किरन आनंद ने बताया कि जिले में जितनी भी जमीनें सीलिंग की हैं, उनकी सूची जल्द ही सभी निबंधन कार्यालयों को उपलब्ध करा दी जाएगी, ताकि उस जमीन की रजिस्ट्री न हो सके। इसके साथ वह सूची भी सार्वजनिक की जाएगी, ताकि आम लोग इससे परिचित हो जाएं। वहीं भूमाफियाओं के खिलाफ जल्द ही अभियान शुरू होगा।