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Raksha Bandhan 2023: दो दिन मनेगा रक्षाबंधन, जानिए किस शुभ मुहूर्त में बांधे राखी

Tue, 29 Aug 2023 11:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, राखी बांधते समय भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। सर्वप्रथम बहन को अपनी अनामिका अंगुली से भाई के मस्तक पर रोली का तिलक लगाकर अक्षत अर्थात साबुत चावल लगाने चाहिए। इसके बाद राखी बांधते हुए मंगलकामना करनी चाहिए।
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गोरखपुर में रक्षाबंधन के अवसर पर खरीदारी करती युवतियां। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में रक्षाबंधन का पर्व इस वर्ष दो दिन मनाया जाएगा। वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, 30 अगस्त की सुबह नौ बजकर बजकर 45 मिनट से 31 अगस्त की सुबह सात बजकर 45 मिनट तक पूर्णिमा तिथि है। लेकिन, 30 को दिन में भद्रा होने से भद्रा काल में रक्षाबंधन वर्जित रहेगा।कर्मकांडी ब्राह्मणों और ज्योतिषियों के अनुसार, 30 अगस्त के रात नौ बजकर 45 मिनट के पश्चात और 31 अगस्त की सुबह सात बजकर 45 मिनट के पूर्व ही राखी बांधी जा सकती है।

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पंडित शरद चंद्र मिश्र व डॉ. जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, रक्षाबंधन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को होता है। इसमें अपराह्न तिथि ली जाती है। यदि दो दिन है तो इसमें पूर्वा और परा दोनों ली जाती है। यदि उस दिन भद्रा है तो रक्षाबंधन का परित्याग करना चाहिए। भद्रा में श्रावणी और फाल्गुनी दोनों वर्जित है,क्योंकि श्रावणी से राजा का और फाल्गुनी से प्रजा का अनिष्ट होता है।

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इस तरह बंधवाएं राखी

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, राखी बांधते समय भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। सर्वप्रथम बहन को अपनी अनामिका अंगुली से भाई के मस्तक पर रोली का तिलक लगाकर अक्षत अर्थात साबुत चावल लगाने चाहिए। इसके बाद राखी बांधते हुए मंगलकामना करनी चाहिए। भाई को भी आपकी बहन की रक्षा का प्रण लेते हुए उपहार भेंट करना चाहिए।

यह है पौराणिक कथा
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, महाभारत में शिशुपाल के वध के दौरान सुदर्शन चक्र धारण करते समय भगवान कृष्ण की उंगली कट गई थी। द्रोपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली में बांध दिया था। माना जाता है कि यह घटना सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को हुई थी। मान्यता है कि इसके बाद से ही राखी का पर्व मनाया जाने लगा।

राखी बांधते समय पढ़ें यह मंत्र
ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल: । तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ।।
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