गोरखपुर। देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उनके गोरखपुर से जुड़े उस ऐतिहासिक प्रसंग को याद करना प्रासंगिक है।वर्ष 1965 में देश खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था और उनकी एक अपील ने रेलवे की खाली जमीन को खेती के लिए इस्तेमाल करने की स्थानीय पहल को जन्म दिया था। ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देने वाले शास्त्री ने राष्ट्रीय संकट के दौर में देशवासियों से उपलब्ध खाली जमीन पर अनाज और सब्जियां उगाने की अपील की थी। रेलवे की खाली जमीन पर गेहूं व आलू की खेती शुरू की गई। इतना ही नहीं, अधिकारियों के बंगलों में भी सब्जियां उगाई गईं।
शास्त्री की अपील के 48 घंटे के भीतर रेलवे ने लिया फैसला
रेलवे के दस्तावेजों के मुताबिक, वर्ष 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बीच देश खाद्यान्न की कमी से जूझ रहा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 10 अक्तूबर 1965 को खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए देशवासियों से अपील की थी। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने भी इस दिशा में कदम उठाया। रिपोर्ट के मुताबिक, अपील के 48 घंटे के भीतर रेलवे प्रशासन ने खाली जमीनों पर गेहूं और आलू उगाने तथा अधिकारियों के बंगलों में सब्जियों की खेती कराने का निर्णय लिया। इसकी शुरुआत गोरखपुर से हुई। 25 नवंबर 1965 तक रेलवे की विभिन्न जगहों पर खेती शुरू हो चुकी थी। 31 जनवरी 1966 को रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने गोरखपुर का विजिट किया और गेहूं, आलू व सब्जियों को देखकर आश्चर्यचकित रह गए। गोरखपुर एरिया से ही गेहूं के 800 टीले (मन) और आलू के 1000 मन का उत्पादन किया गया था।