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नवजात हत्या मामला: दुष्कर्म आरोपित विभाष्म का कोर्ट में आत्मसमर्पण, जानें क्या है पूरी खबर

Wed, 26 Feb 2020 10:14 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर

सार

  • एक दिन पहले दी थी अर्जी, पुलिस को गच्चा देकर कोर्ट पहुंचा
  • नाबालिग मां की पुलिस कस्टडी बढ़ाई गई, मेडिकल जांच के लिए कोर्ट से मिली अनुमति
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आरोपी विभाष्म सिंह (file)। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीपीगंज इलाके में दुष्कर्म कर नाबालिग को मां बनाने और नवजात की हत्या करने के आरोपित विभाष्म सिंह ने मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। विभाष्म ने एक दिन पहले ही आत्मसमर्पण की अर्जी थी। इसकी जानकारी पुलिस को भी थी। पुलिस दिनभर कोर्ट के बाहर इंतजार करती रही और दुष्कर्म आरोपित ने आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट में आत्मसमर्पण के बाद विभाष्म को जेल भेज दिया गया।
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जानकारी के मुताबिक, लगातार दबिश दे रही पुलिस के दबाव को देखते हुए आरोपित ने कोर्ट में आत्मसमर्पण के लिए अर्जी दी थी। मंगलवार को पुलिस भी कोर्ट के आसपास मौजूद थी, लेकिन गच्चा देकर विभाष्म ने आत्मसमर्पण कर दिया। आपको बताएं पीपीगंज इलाके में नाबालिग से दुष्कर्म कर उसे मां बनाने और नवजात की हत्या में आरोपित विभाष्म सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज है। एसपी जेल डॉ. रामधनी ने बताया कि विभाष्म को सात दिन तक मिलेनियम बैरक में रखा जाएगा, फिर उसे दूसरे बैरक में शिफ्ट किया जाएगा।
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नाबालिग मां की पुलिस कस्टडी बढ़ी, मेडिकल जांच के लिए कोर्ट से मिली अनुमति

बालिका संरक्षण गृह में रखी गई नाबालिग मां की मेडिकल जांच के लिए कोर्ट से अनुमति मिल गई है। प्रसव की जांच के लिए तीन दिन का समय मांगा गया है। बुधवार से तीन दिन की प्रक्रिया में मेडिकल टेस्ट होगा, जिसके बाद फिर कोर्ट में बयान दर्ज कराया जाएगा। नाबालिग मां के प्रसव के मेडिकल जांच के लिए पुलिस की ओर से दी गई अर्जी को कोर्ट ने स्वीकार करते हुए अनुमति दे दी है। एसओ कैंपियरगंज निर्भय नारायण सिंह ने बताया कि रिमांड बढ़ाई गई है। बुधवार से तीन दिन में मेडिकल की प्रक्रिया कराने के बाद कोर्ट में नाबालिग मां का 164 का बयान दर्ज कराया जाएगा।

यह हुआ था
31 जनवरी को पीपीगंज इलाके के एक गांव में नवजात बच्ची की हत्या कर फेंका गया शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चार फरवरी को पीपीगंज के थानेदार राज प्रकाश सिंह की तहरीर पर केस दर्ज कर तहकीकात शुरू की गई। बाद में जांच कैंपियरगंज एसओ निर्भय नारायण सिंह के हवाले कर दी गई थी। इस मामले में शुरू से ही पुलिस टालमटोल कर रही थी। जब अमर उजाला ने प्रमुखता से लगातार इस संबंध में खबरें प्रकाशित करनी शुरू कीं तो डीआईजी राजेश डी मोदक और एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने इसका संज्ञान लेकर कार्रवाई का आदेश दिया। उसके बाद सक्रिय हुई पुलिस ने लापता किशोरी को खोज निकाला। उसके सामने आते ही पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।
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