गोरखपुर के एसएसपी डॉ. विपिन ताडा।
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होटल कृष्णा पैलेस में कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत के बाद गोरखपुर पुलिस की किरकिरी के बीच ही पुलिस कप्तान डॉ. विपिन ताडा की रणनीति काम आई है। कानपुर एसआईटी को जांच मिलने के बाद एसएसपी ने पूरे प्रकरण से भले ही दूरी बना ली, लेकिन हत्यारोपित पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी पर काम करते रहे। इसके लिए जिले के तेज तर्रार पुलिस कर्मियों की टीमें बनाईं। इसी का नतीजा रहा कि घटना के मुख्य आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह और तत्कालीन फलमंडी चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा को दबोचा जा सका। इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ के साथ ही कानपुर एसआईटी भी लगी थी, लेकिन सफलता गोरखपुर पुलिस के हाथ लगी है।
जानकारी के मुताबिक, 27 सितंबर की रात होटल कृष्णा पैलेस में जांच के नाम पर जेएन सिंह एंड कंपनी गई थी। मारपीट के बीच ही मनीष गुप्ता की मौत हो गई थी। मामले के तूल पकड़ने पर एसआईटी कानपुर को मामले की जांच सौंप दी गई। इसके बाद एसएसपी गोरखपुर ने खुद को इस केस से दूर कर लिया, लेकिन चारों तरफ जिला पुलिस की किरकिरी हो गई। लिहाजा, एसएसपी ने खामोशी से आरोपियों की गिरफ्तारी की रणनीति बना डाली।
एसएसपी ने शुरुआत में पुलिस की जो टीमें लगाईं, वे खाली हाथ लौट आईं। इसके बाद जिले के तेज तर्रार पुलिस कर्मियों की अलग-अलग टीमें बनाई गईं। कैंट इंस्पेक्टर सुधीर सिंह, बांसगांव इंस्पेक्टर राणा देवेंद्र प्रताप सिंह, स्वाट के सादिक परवेज सहित आठ टीमें गठित करके अलग-अलग जिलों में भेजा गया।
सभी टीमें अपने-अपने संपर्क के माध्यम से हत्यारोपियों की तलाश में जुटी थीं। दबाव बनाने के लिए चौकी इंचार्ज रहे अक्षय मिश्रा के बेटे को भी उठा लिया गया था। एसएसपी लगातार पुलिस वालों को गाइड कर रहे थे। दबाव बढ़ता देख जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा ने कोर्ट में सरेंडर करने की रणनीति बनाई और दबोचे गए।
घटना के बाद ही क्राइम ब्रांच को सौंप दी थी जांच
रामगढ़ताल थाने में हत्या का केस दर्ज होने के बाद आरोप न लगे इसलिए मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी, लेकिन इसी बीच मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी की मांग पर जांच को कानपुर पुलिस के हवाले कर दिया गया। एसआईटी कानपुर ही मामले की जांच कर रही है। लेकिन मामले के दोनों मुख्य आरोपियों जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा की गिरफ्तारी गोरखपुर पुलिस ने की है।