ऐसे मामलों की जांच रिकॉर्ड के मुताबिक यह गिरोह बेहद व्यवस्थित तरीके से अपराध को अंजाम देता है। शुरू में एक हजार रुपये मांगते हैं, नहीं देने पर रिकॉर्ड अश्लील चैट वायरल करने की धमकी देते हैं। अगर रकम मिल गई तो इसके बाद फिर सीधे 10 हजार रुपये की मांग करते हैं। रकम के लिए वे सिलसिलेवार अभियान चलाते हैं। इतना ही नहीं कुछ दिन बाद खुद को साइबर सेल का अधिकारी बताकर लड़की की तरफ से शिकायत दर्ज कराने का भय दिखाते हैं। इस सिलसिले को खत्म करने के नाम पर वे मोटी रकम की डिमांड करते हैं।
लॉकडाउन में बनाया शिकार
कोरोना के बीच लॉकडाउन में लोगों ने खुद को आइसोलेट होने, अकेलेपन की तकलीफ बताने वाले जुमलों के स्टेटस फेसबुक या इंस्टाग्राम पर डाल दिए थे। गैंग के लोगों ने खासतौर पर ऐसे लोगों को ही निशाना बनाया है। किससे कितनी वसूली करनी है, साइबर ब्लैकमेलर इसको लेकर भी सोशल मीडिया पर आपके पेज को देखकर अंदाजा लगाते हैं।
साइबर सेल की सलाह
एसपी साइबर क्राइम त्रिवेणी सिंह बताते हैं कि ब्लैकमेलिंग का यह नया ट्रेंड सामने आया है। प्रदेश में ऐसी कई शिकायतों की जांच चल रही है। 50 से अधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इस तरह की ब्लैकमेलिंग से बचने के लिए किसी भी अंजान आईडी से आने वाले फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। इसके अलावा अंजान युवक या युवती से किसी प्रकार की आपत्तिजनक चैट या वीडियो कॉल न करें। अगर कोई इस ट्रैप(जाल) में फंस जाए तो धैर्य रखें। हड़बड़ी या जल्दबाजी में कोई गलती न करें। उन्हें अपना व्हाट्सएप नंबर तत्काल बंद कर देना चाहिए। इसके अलावा संभव हो तो अपना फोन भी बंद कर दें। फेसबुक और इंस्टाग्राम की आईडी को भी लॉगआउट कर दें। चूंकि, ऐसे ब्लैकमेलर डार्क नेट की वेबसाइट पर काम करते हैं। किसी भी खाताधारक से उनकी निजी दुश्मनी नहीं होती। आईडी बंद होने के बाद तत्काल डार्क नेट दूसरे शिकार की तलाश शुरू कर देते हैं। अगर इन सब सावधानियों के बाद भी ट्रैप हो जाते हैं तो बिना संकोच तत्काल इसकी शिकायत साइबर अपराध थाने में करें।
केस 1
गीता प्रेस इलाके के एक बड़े दवा व्यापारी के पास कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक अनजान की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। उसे स्वीकार करने के बाद दूसरी तरफ से मैसेंजर पर उनका व्हाट्सपर नंबर मांगा गया। नंबर देने के बाद उनसे वीडियो चैट के माध्यम से संवाद स्थापित हुआ। इसके बाद आपत्तिजनक चैट को रिकार्ड कर लिया गया। अभी तक गैंग ने उनसे 70 हजार रुपये लिए हैं। खुद को इस गिरोह के जाल में फंसता देख उन्होंने साइबर सेल में इसकी शिकायत की है।
केस 2
देवरिया के एक बड़े इंजीनियर भी गैंग के जाल में फंस गए हैं। कोरोना के बीच में घर पर ही आइसोलेट थे। ऐसे में उन्होंने भी फेसबुक के माध्यम से एक अंजान युवती से दोस्ती की। इसके बाद उनसे भी मैसेंजर पर बातचीत शुरू हो गई। उन्होंने भी अपना व्हाट्सएप नंबर गैंग के सदस्य को चैट के दौरान दे दिया। इसके बाद उसने भी आपत्तिजनक चैट और वीडियो के आधार पर अभी तक 91 हजार रुपये वसूल लिए। उन्होंने भी खुद को घिरता देखकर इसकी शिकायत साइबर सेल में की है।