शिकायतकर्ता की तहरीर पर 20 मार्च 2020 को कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसमें तत्कालीन चौकी प्रभारी सोनूपार दीपक सिंह के अलावा कोतवाली में ही तैनात रहे दीपक के भाई दरोगा राजन सिंह, तत्कालीन कोतवाल रामपाल यादव, तत्कालीन महिला थाना प्रभारी शीला यादव, दरोगा अभिषेक सिंह, आरक्षी संजय कुमार, आलोक कुमार, पवन कुशवाहा, अवधेश सिंह, महिला आरक्षी दीक्षा यादव, नीलम सिंह, हल्का लेखपाल शालिनी सिंह व कानूनगो सतीश के साथ दो-तीन अन्य अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पहले जांच सीओ सिटी को सौंपी गई थी और बाद में इसे संतकबीरनगर जनपद स्थानांतरित कर दिया गया था।
31 मार्च 2020 को प्रकरण की हुई थी शुरूआत
कोरोना की पहली लहर के दौरान 31 मार्च 2020 को इस प्रकरण की शुरूआत हुई। कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली युवती ने सोनूपार चौकी प्रभारी रहे दीपक सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए आला अफसरों से शिकायत की थी कि 31 मार्च 2020 को वह दादी की दवा लेने जा रही थी। तत्कालीन प्रभारी दारोगा दीपक सिंह ने उसे रोका और गाड़ी के कागजात चेकिंग के बहाने उसका मोबाइल नंबर ले लिया था। उसी दिन से दारोगा उसके मोबाइल नंबर पर फोन करने लगा था। युवती ने आपत्ति जताई तो पट्टीदारी के विवाद को आधार बनाकर उसके घरवालों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर दिए गए।
दो अगस्त हो होगी बर्खास्त दरोगा की पेशी
45 दिन की अंतरिम जमानत की अवधि पूरी होने पर सीजेएम न्यायालय ने बर्खास्त हो चुके आरोपित दरोगा को 23 जुलाई को तलब किया था। शुक्रवार को इस मामले में उसे दो अगस्त तक की मोहलत दे दी गई है।