कम्युनिटी में संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। हाल के दिनों में मुंबई, दिल्ली, गुजरात सहित अन्य शहरों से आए 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों की कोरोना जांच का फैसला लिया गया है। क्योंकि अब तक जितने भी मरीज मिले हैं, सभी बाहर से ही आए हैं। इसके लिए गांव-गांव में बुजुर्गों की सूची तैयार की जा रही है।
जिले में लगातार कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस वजह से प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा की मुश्किलें बढ़ गई है। अब तक जितने भी मरीज मिले हैं, उनमें 95 प्रतिशत मरीज मुंबई के हैं, जबकि पांच प्रतिशत में दिल्ली, गुजरात और चेन्नई के मरीज शामिल हैं।
इसके अलावा जिले में सवा लाख लोग गैर प्रांतों से आए हैं। इनमें सभी की जांच भी नहीं हो सकी। कोरोना संक्रमण का असर बुजुर्गों पर ज्यादा है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग जिले के प्रत्येक गांव में बाहर से आए बुजुर्गों की तलाश में जुट गई है।
इन बुजुर्गों की जानकारी के लिए निगरानी समितियां, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व स्वास्थ्य टीमें लगाई गई हैं। अब नए सिर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की 38 व मोबाइल मेडिकल यूनिट की पांच टीमों को भी गांवों में लगा दिया गया है। ये टीमें निगरानी समितियों की मदद से बाहर से आए लोगों के स्वास्थ्य व ब्लड प्रेशर की जांच करने के साथ ही 60 वर्ष व इससे ऊपर के लोगों की सूची भी तैयार कर रही हैं।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा कि सामुदायिक संक्रमण रोकने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके लिए अब राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम व मोबाइल मेडिकल यूनिट की टीमें भी लगा दी गई हैं। इसके अलावा निगरानी समितियां, आशा और आंगनबाड़ी वर्कर भी लगाई गई है।