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Exclusive: गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र, शिक्षक और कर्मचारी संघों के चुनाव पर घमासान, साल 2016 के बाद नहीं हुआ चुनाव

Sat, 18 Sep 2021 01:54 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।

सार

चुनाव के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्र। वर्ष 2017 के बाद नहीं हुआ शिक्षक और कर्मचारी संघ का चुनाव, विवि प्रशासन मौन।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षक, कर्मचारी और छात्रों के हितों की आवाज उठाने के लिए बने संगठन बीते चार-पांच सालों से निष्क्रिय पड़े हैं। छात्र संघ का चुनाव 2016 के बाद हुआ ही नहीं। अब छात्र चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं । इसी तरह वर्ष 2017 के बाद से शिक्षक और कर्मचारी संघों का भी चुनाव नहीं हुआ है। इनके चुनाव कराने की मांग लगातार हो रही है। चुनाव की मांग को लेकर विवि प्रशासन लगभग खामोशी की मुद्रा में है।  
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शिक्षक संघ का चुनाव कराने के लिए निवर्तमान अध्यक्ष प्रोफेसर वीके सिंह इस्तीफा दे चुके हैं। इनके अलावा कई शिक्षकों ने कुलपति को पत्र लिखकर चुनाव की मांग की है। जबकि, चुनाव न होने पर कर्मचारी संघ आपस में ही लड़ कर दो गुट बना चुके हैं। उधर, छात्र संघ चुनाव की मांग जोर पकड़ने लगी है। विद्यार्थी आंदोलन कर रहे हैं। निर्णय लेने के लिए कमेटी बनी है, लेकिन तस्वीर साफ नहीं हो सकी।  
 
छात्रसंघ : 2016 में हुआ था छात्रसंघ चुनाव, 2018 में नामांकन के बाद स्थगित
गोरखपुर। विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव अंतिम बार 2016 में हुआ था, जिसमें अरविंद कुमार यादव उर्फ अमन अध्यक्ष, अखिलदेव त्रिपाठी उपाध्यक्ष और ऋचा चौधरी महामंत्री चुनी गई थीं। इसके बाद वर्ष 2018 में चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई। 4 व 5 सितंबर को नामांकन हुआ और 13 सितंबर को मतदान होना था। इसी बीच छात्रों के दो गुटों में बवाल हो गया।  विवि प्रशासन ने चुनाव स्थगित कर दिया। इसके बाद से हर साल चुनाव की मांग होती है, धरना-प्रदर्शन भी होते हैं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता।  इस वर्ष फिर चुनाव कराने की आवाज उठने लगी हैं। छात्र नेताओं ने विवि प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। बैठक कर आंदोलन की   रूपरेखा तैयार की है। भारी बारिश के चलते प्रदेश सरकार के निर्देश पर विवि दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। अब सोमवार को खुलेगा, तब हंगामा होने के आसार हैं।
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छात्रनेता नीतीश मिश्रा ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव नहीं होने विवि प्रशासन मनमाने ढंग से छात्र के अहित में फैसले ले रहा है। बुनियादी सुविधाएं जैसे शुद्ध पेयजल, शौचालय की सफाई, लाइब्रेरी में अच्छी पुस्तकें आदि पर ध्यान नहीं है। रेट की ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा छात्र हित में नहीं थी। इस तरह कई फैसले हैं, जिससे छात्रों को दिक्कतें हुई। चुनाव के बारे में विवि प्रशासन कुछ स्पष्ट नहीं बता रहा है। सोमवार से हमारा विरोध जारी रहेगा। काली पट्टी बांधकर विवि प्रवेश द्वार पर सभी छात्रनेता धरने पर बैठेंगे।

शिक्षक संघ: निवर्तमान अध्यक्ष दे चुके हैं इस्तीफा, शिक्षक कर चुके मांग

डीडीयू के कुलपति प्रो. राजेश सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
शिक्षक संघ चुनाव वर्ष 2017 में हुआ था। इसका कार्यकाल एक वर्ष का होता है। कार्यकाल समाप्त होने पर 2018 में चुनाव की मांग की गई, लेकिन तत्कालीन कुलपति प्रो वीके सिंह ने चुनाव अधिकारी घोषित नहीं किया। इसके बाद कोविड संक्रमण को देख शिक्षकों ने मांग नहीं की। इस वर्ष 23 जून को चुनाव कराने के लिए निवर्तमान अध्यक्ष प्रो विनोद कुमार सिंह ने कुलपति को पत्र लिखा था और बाद में इस्तीफा दे दिया। प्रो सिंह ने सप्ताह भर में चुनाव न होने पर बाइलॉज का हवाला देते हुए आमसभा को चुनाव अधिकारी घोषित करने की बात कही थी। यह बात अलग है कि तबसे न तो विवि प्रशासन ने चुनाव की घोषणा की और न ही आमसभा की बैठक हो सकी। इस बीच 19 अगस्त 2021 को शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल कुलपति से मिला और एक पत्रक दिया। इसमें कार्यकारिणी का चुनाव नियमानुसार 31 अगस्त तक कराने की मांग की थी। प्रतिनिधिमंडल में प्रो अनिल यादव, प्रो संजय बैजल, प्रो एसएन त्रिपाठी, डॉ सुधाकर लाल श्रीवास्तव सहित 20 से ज्यादा शिक्षक शामिल थे।
 
विवि प्रशासन ने बनाई थी कमेटी
अगस्त में शिक्षक संघ के चुनाव की मांग जब जोर पकड़ने लगी तो छात्र संघ की मांग भी उठने लगी। छात्रों ने शिक्षक संघ चुनाव के पहले छात्र संघ चुनाव कराने की मांग कर डाली। विरोध को विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंभीरता से लिया। छात्रों द्वारा ज्ञापन सौंपने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कमेटी गठित की, जिसे वार्षिक परीक्षाओं के बाद शिक्षक संघ और छात्र संघ दोनों चुनाव के विषय में विचार करना था। कमेटी को कोविड-19, राजभवन और शासन के निर्देश के मुताबिक चुनाव को लेकर रिपोर्ट तैयार कर विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपना था। इसी रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन निर्णय लेने वाला था। लेकिन, कमेटी में कौन-कौन शामिल थे, रिपोर्ट दी गई या नहीं और निर्णय क्या लिया गया, इस पर भी कुछ स्पष्ट नहीं हो सका।
 
निवर्तमान अध्यक्ष शिक्षक संघ प्रो विनोद कुमार सिंह ने बताया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत शिक्षक संघ का चुनाव होना चाहिए। जब मेरा एक साल का कार्यकाल पूरा हुआ तो तत्कालीन कुलपति प्रो वीके सिंह से चुनाव कराने की मांग की। उसी समय दो शिक्षकों पर एक मामले में हरिजन एक्ट के तहत केस दर्ज हो गया। आमसभा ने पहले मामले की लड़ाई का निर्णय लिया, फिर कोविड के चलते चुनाव नहीं हो सका। मैंने कुलपति को पत्र लिखकर मांग की थी, लेकिन अभी तक कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। नैतिक दायित्व के तहत मैंने इस्तीफा दे दिया।
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कर्मचारी संघ का चुनाव हुआ नहीं, दो नए संगठन बन गए

विश्वविद्यालय में कर्मचारी संघ का चुनाव चार साल पहले 2017 में हुआ था। तब महेंद्र नाथ सिंह अध्यक्ष चुने गए और करीब पूरी कार्यकारिणी उन्हीं की चुनी गई। इसके बाद से चुनाव नहीं हुआ। कर्मचारी नेताओं ने चुनाव की मांग उठाई, लेकिन नतीजा नहीं निकला। उधर, तत्कालीन पदाधिकारियों ने कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन के नाम से रजिस्ट्रेशन करा लिया, जिसे विवि प्रशासन ने पंजीकृत कर लिया। वहीं, चुनाव की मांग करने वाले नेताओं ने संघर्ष समिति कर्मचारी संघ के नाम से नया संगठन बना लिया।
 
संयोजक संघर्ष समिति कर्मचारी संघ मनीष त्रिपाठी ने बताया कि कर्मचारी संघ का चुनाव 2017 में हुआ था। एक साल बाद 2018 में कार्यकाल खत्म हो गया, लेकिन संघ का चुनाव नहीं कराया गया। कई बार विवि प्रशासन से मांग की गई। कर्मचारियों का हित प्रभावित न हो इसलिए संघर्ष समिति कर्मचारी संघ बनाया गया है। चुनाव की मांग कर रहे हैं। विवि प्रशासन के रवैये का इंतजार करेंगे। चुनाव नहीं कराया गया तो आमसभा की बैठक बुलाकर निर्णय लिया जाएगा।
 
अध्यक्ष कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन महेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि कर्मचारी संघ का पंजीकरण ही नहीं था। दो बार अध्यक्ष रहा। पंजीकरण का प्रयास किया गया, लेकिन कोई कागज नहीं मिला। पूर्व के पदाधिकारियों से भी कोई कागजात नहीं मिला। अक्तूबर 2018 में कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया गया। इसके बाइलॉज के मुताबिक पांच साल तक कार्यकाल है। जो लोग विरोध कर रहे हैं या तो वे कर्मचारी संघ का पंजीकरण लेकर आएं या नए पंजीकृत संगठन में आएं। आमसभा की बैठक बुलाकर उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा।
 
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजेश सिंह ने बताया कि शिक्षक संघ चुनाव के लिए शिक्षक आए थे। उन्हें बताया गया है कि चुनाव अगले साल कराया जाएगा। छात्रसंघ चुनाव के लिए कमेटी की रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। शासन से भी अनुमति ली जाएगी। अनुमति मिल जाती है तो छात्रसंघ चुनाव करा दिया जाएगा।
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