उद्योग बंधु की बैठक को कमिश्नर रवि कुमार एनजी ने संबोधित किया।
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स्वरोजगार के लिए चलाई जा रही कई सरकारी योजनाओं की फाइलें बैंकों में लंबित रहने की जानकारी होने पर कमिश्नर रवि कुमार एनजी ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों को स्वरोजगार मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे में आवेदकों की फाइलें यदि बैंक के स्तर पर लटकी मिलीं तो संबंधित की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी।
कमिश्नर बुधवार को आयुक्त सभागार में मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक कर रहे थे। इस दौरान बताया गया कि वर्ष 2021-22 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मंडल में निर्धारित लक्ष्य 312 के सापेक्ष 447 आवेदन पत्र बैंकों को भेजे गए। इनमें से 149 ही स्वीकृत हुए और 79 को ऋण वितरित किया गया। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में 311 के सापेक्ष 619 आवेदन पत्र बैंकों को भेजे गए। इनमें से 126 स्वीकृत हुए तथा 65 को ऋण वितरित किया गया है।
कमिश्नर ने कहा कि उद्यमियों की समस्याओं का समय से गुणवत्ता के साथ निस्तारण किया जाए। कोई भी उद्यमी परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्यमी अपनी सभी तरह की समस्याओं को साझा कर सकें इसलिए उद्योग बंधु की बैठक का एजेंडा तीन दिन पहले ही उद्यमियों को उपलब्ध करा दिया जाए। बैठक में उद्यमियों ने गीडा में कामन एन्फ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का भी मामला उठाया।
गीडा के अफसरों ने बताया कि 7.5 एमएलडी सीईटीपी की संशोधित डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) जल निगम द्वारा बनाई गई है। डीपीआर को स्टेट मिशन फार क्लीन गंगा लखनऊ एवं परियोजना निदेशक राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन नई दिल्ली को भेजा जा चुका है। बैठक में ऐसे उद्यमियों पर भी चर्चा हुई, जिन्हें 2014 में भूखंड पर कब्जा नहीं मिल पाया था।
गीडा प्रबंधन द्वारा बताया गया कि अभी तक ऐसे 22 आवंटियों को भूखंड आवंटित नहीं हुए हैं। गीडा के पास पिपरापुर में जमीन ली जानी है लेकिन लेकिन हाईकोर्ट में वाद लंबित होने के कारण स्थगन आदेश प्रभावी है। बैठक में गीडा के सीईओ पवन अग्रवाल, चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह, लघु उद्योग भारती के आशीष खेतान, अशोक शाव, चेंबर आफ रेडीमेड गारमेंट्स के अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ला आदि उपस्थित रहे।