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अधूरा प्लांट बना राह में रोड़ा: सीएम चाहते हैं सफाई में नंबर वन बने गोरखपुर, एकला बंधे पर कूड़ा फेंक रहा निगम

Tue, 18 Jul 2023 04:26 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

थनी में प्लांट नहीं बनने का खामियाजा एकला बंधे के आसपास के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। एकला बंधे से सटे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गंध से इन दिनों सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। वजह यह है कि शहर से एकत्र कूड़ा वैसे ही बंधे पर गिरा दिया जा रहा। इसकी वजह से पूरे क्षेत्र में दुर्गंध रहता है।
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एकला बांध पर फेंका गया कूड़ा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर को बेहतर रैंक दिलाने के लिए सभी प्रयास करने के निर्देश अफसरों को दिए हैं, लेकिन अभी जो व्यवस्था है उससे लगता नहीं कि बहुत ज्यादा सफलता मिलेगी। इसकी वजह भी है। शहर को कूड़ा से मुक्त करने के लिए सहजनवां क्षेत्र के सुथनी में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पांच साल बाद भी तैयार नहीं हो सका है। इसका नतीजा यह है कि पूरे शहर का कूड़ा एकला बंधे पर गिराया जा रहा है। इससे आसपास के लोगों का जीना मुहाल हो गया है।

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नगर निगम की स्वच्छता रैंकिंग कवायद को कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) की लापरवाही विफल कर सकती है। बेहतर रैंकिंग के लिए शहर को साफ-सुथरा रखा जाना है। निगम की टीम सुबह घर- घर जाकर कूड़ा उठा भी रही है, लेकिन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के तैयार नहीं होने से कूड़ा खुले में एकला बंधे पर गिराया जा रहा है। कार्यदायी फर्म की मानें तो सितंबर में इसे पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन नाम न छपने की शर्त पर निगम के अधिकारियों ने बताया कि अभी इसे पूरी तरह बनकर तैयार होने में नवंबर या दिसंबर तक का समय लग सकता है।

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काफी माथापच्ची के बाद तय हुआ था सुथनी

पांच साल पहले जिले में कूड़ा निस्तारण के लिए सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाए जाने की योजना तैयार की गई थी। इसके लिए जमीन चिह्नित नहीं होने से योजना को धरातल पर उतरने में काफी समय लग गया। कई जगहों को देखने के बाद वर्ष 2021 अक्तूबर में सहजनवां क्षेत्र के सुथनी गांव में प्लांट बनाए जाने पर सहमति बनी। नवंबर 2021 में प्रस्ताव तैयार कर निविदा निकाली गई। जनवरी 2022 में काम का टेंडर कार्यदायी फर्म सीएंडडीएस को सौंप दिया गया।

लक्ष्य था कि इसे 2023 अप्रैल तक हर हाल में बनाकर तैयार कर लिया जाएगा। लेकिन अभी 75 प्रतिशत तक ही काम पूरा हो सका। ऐसे में कूड़ा अभी भी खुले में एकला बंधे के पास ही गिराया जा रहा है। कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों का कहना है कि अचानक क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र ने यहां की डिजाइन को लेकर और गीले-सूखे कूड़े निस्तारण के लिए नई योजना जोड़ दी। इसके अनुसार यहां गीले कूड़े के लिए बायो वेस्टेज प्लांट का भी काम शुरू किया गया। इन्हीं कारणों से काम अभी तक पूरा नहीं हो सका।

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प्लांट नहीं बनने का खामियाजा भुगत रहे एकला बंधे के आसपास के लोग
सुथनी में प्लांट नहीं बनने का खामियाजा एकला बंधे के आसपास के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। एकला बंधे से सटे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गंध से इन दिनों सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। वजह यह है कि शहर से एकत्र कूड़ा वैसे ही बंधे पर गिरा दिया जा रहा। इसकी वजह से पूरे क्षेत्र में दुर्गंध रहता है। रही- सही कसर लापरवाह कर्मचारी पूरा कर दे रहे हैं। कूड़ा गिराने के बाद उसे आग लगाकर नष्ट किया जाता है। इसका धुआं शहर और ग्रामीण दोनों ही इलाकों की करीब 50 हजार से ज्यादा की आबादी को परेशान कर रहा है।
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एकला बंधे के पास इन इलाकों में होती है दिक्कत

कूड़ा फेंकने वाली जगह से दो सौ मीटर के दायरे में फल मंडी, बर्फखाना, हांसूपुर, घंटाघर, बसंतपुर, एकला, नौसड़, बहरामपुर, पिपरी, इंद्राचक, ज्वाहरचक समेत कई अन्य इलाके हैं। यहां करीब 50 हजार लोग रहते हैं। आस-पास के लोग नगर निगम के खिलाफ विरोध भी करते हैं। उनका कहना है कि कई बार प्रदर्शन किया गया, बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हो सका।

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नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि पिछले दिनों प्लांट का निरीक्षण किया गया था। कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया गया है कि तय समय के भीतर काम पूरा कर सौंपें। मुख्य अभियंता से काम निगरानी करने के लिए कहा गया है। इसके बन जाने से कूड़ा निस्तारित करने के साथ साफ-सफाई रखने में काफी सुविधा होगी।

प्रोजेक्ट मैनेजर सीएंडडीएस दीपक यादव ने कहा कि नगर निगम की ओर से प्लांट के पास सड़क बनवाई जा रही है। ऐसे में प्लांट का काम कराने में थोड़ी परेशानी हो रही है। पिछले वर्ष स्वीकृत डिजाइन में संशोधन आ गया था। इससे भी कुछ समय अधिक लग गया। हमारा प्रयास है कि सिंतबर तक इसे बनाकर तैयार कर दिया जाए। बनकर तैयार होने पर 500 मीट्रिक टन कूड़ा प्रतिदिन शोधन हो सकेगा। 200 मीट्रिक टन गीले कूड़े के लिए भी बायो केमिकल वेस्ट बनाया जा रहा है।


 
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