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सीएम योगी ने कहा- यूक्रेन से लौटे मेडिकल विद्यार्थियों का भविष्य संवारेगी सरकार

Thu, 10 Mar 2022 05:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

मुख्यमंत्री ने यूक्रेन से लौटे 16 विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से की मुलाकात।
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गोरखनाथ मंदिर में यूक्रेन से लौटे छात्रों के साथ सीएम योगी... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूक्रेन से सकुशल लौटै मेडिकल विद्यार्थियों का भविष्य संवारने के लिए भारत सरकार और प्रदेश सरकार इंडियन मेडिकल रिसर्च काउंसिल से संपर्क में है। यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूक्रेन से लौटे गोरखपुर के 16 मेडिकल विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से बुधवार को मुलाकात के दौरान कही। 

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गोरखनाथ मंदिर के तिलक हॉल में विद्यार्थियों से भेंट कर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि युद्धग्रस्त यूक्रेन से विद्यार्थियों की वापसी मोदी सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती है। यूक्रेन से अपने नागरिक-विद्यार्थियों को सकुशल वापस लाने की जिम्मेदारी सिर्फ भारत सरकार ने ही निभाई। अन्य देश खासकर अफ्रीकी देशों की  सरकारों ने अपने नागरिकों की सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन पर हमला होते ही आला अधिकारियों के साथ बैठक की और नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए ऑपरेशन गंगा शुरू किया। विद्यार्थियों-नागरिकों को लाने का जिम्मा चार केंद्रीय मंत्रियों को भेजा। केंद्र और राज्य सरकारों ने नोडल अधिकारी तैनात किए। विद्यार्थियों को सलाह दी कि अपने पाठ्यक्रम से जुड़े रहें और मानसिक मजबूती बनाए रखें। इससे वह अपने कॅरियर को विपरीत परिस्थितियों में भी आगे ले जाने में सफल हो सकेंगे।
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2078 विद्यार्थी सकुशल लौटे
सीएम योगी ने बताया कि यूक्रेन में उत्तर प्रदेश के 2290 विद्यार्थी रहते हैं। इनमें से 2078 सकुशल लाए जा चुके हैं। गोरखपुर के 74 विद्यार्थियों में से 70 लौट चुके हैं। शेष चार में से दो बच्चे पोलैंड एयरपोर्ट पर भारतीय दूतावास में हैं। दो विद्यार्थी यूक्रेन के सुरक्षित शहर पोलतावा पहुंच चुके हैं। सभी जल्द ही सकुशल घर आएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनकी पहल से ही युद्धग्रस्त क्षेत्र से बच्चे सकुशल लौट रहे हैं।

प्रधानमंत्री की कुशल विदेश नीति से मिली सफलता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीयों को वापस लाने में पीएम मोदी की कुशल विदेश नीति है। उनकी पहल का ही नतीजा है कि रोमानिया, हंगरी और पोलैंड जैसे देशों ने भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद की। पीएम की सलाह पर रूस और यूक्रेन ने सीजफायर किया और भारतीय नागरिक सुरक्षित निकल सके। अभियान में कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विद्यार्थी-अभिभावक दिखे भावविभोर
यूक्रेन से सकुशल लौटे विद्यार्थी और उनके अभिभावक बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर उनके व्यवहार से भावविभोर नजर आए। विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री ने पूछा कि लौटने में कोई परेशानी तो नहीं आई। बच्चों ने बताया कि सिर्फ यूक्रेन में परेशानी हुई। सीमा पार करने के बाद सबका सहयोग मिला। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनके कारण ही सब सकुशल अपने घर लौट सके।

इन मेडिकल विद्यार्थियों से मिले सीएम...मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूक्रेन से लौटी प्रियांशी गुप्ता, रक्षा श्रीवास्तव, सौम्या राज, विपुल शुक्ल, हरिमोहन कुमार, हर्षिता कौशल उपाध्याय, आयुष द्विवेदी, चयनिका सिंह, काजल कश्यप, खुशी कश्यप, सृष्टि सिंह, पवन कुमार यादव, अमन कुमार दुबे, निखिल तिवारी, अखिलेश कुमार और निखिल दुबे से मिले।
 

स्वदेश छोड़ यूक्रेन गए तीन प्रवासी परिवार युद्ध के कारण फंसे

ताजनगरी छोड़ यूक्रेन गए तीन प्रवासी परिवार युद्ध के हालात में वहां फंस गए हैं। यूक्रेनी पासपोर्ट के कारण उन्हें बॉर्डर पार नहीं करने दिया जा रहा। इधर, स्वजनों को लेकर परिजन परेशान हैं। मदद की गुहार लगा रहे हैं। ताजनगरी के 74 छात्र वापस लौट आए हैं। ये सभी डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए थे। सभी छात्र सकुशल वापस लौट आए हैं, परंतु तीन प्रवासी परिवार अभी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। खंदारी निवासी घनश्याम दास गुप्ता ने बताया कि उनका बेटा-बहू व तीन पोती एवं पोता यूक्रेन के स्लोवाकिया बॉर्डर पार नहीं कर सके हैं। वहां की सेना उन्हें बॉर्डर पार नहीं करने दे रही।

दक्ष बोले-भारत सरकार ने हरसंभव मदद की, रोमानिया पहुंच मिली राहत
यूक्रेन युद्ध में फंसे सादाबाद के प्रगतिपुरम निवासी छात्र दक्ष चौधरी भी बुधवार को सकुशल अपने घर पहुंच गए। उनके घर पहुंचते ही घर में खुशी की लहर दौड़ गई। दादी दक्ष से लिपटकर खूब रोईं। दक्ष ने बताया कि 24 फरवरी को जैसे ही युद्ध शुरू हुआ तो उनके कॉलेज ने उनको जमीन के अंदर बने बंकरों में जाने का निर्देश दिया। बंकरों में काफी संख्या में विद्यार्थियों के साथ वहां के अन्य निवासी भी थे। जिसको जैसा और जितना खाना मिलता, उतने में ही गुजारा करना पड़ रहा था। जब पोलैंड की सीमा पार कर रोमानिया पहुंचे तो तब जाकर काफी राहत मिली।

 
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भूखे पेट एक दिन में 31 किमी पैदल चले, तब जाकर बची जान

यूक्रेन के खारकीव शहर से जान बचाकर वतन वापसी करने वाले सिद्धार्थनगर के बिस्कोहर निवासी शहाबुद्दीन बुधवार सुबह घर पहुंचे तो अपनों की आंखें खुशी से नम हो गईं। वह भूखे पेट एक दिन में 31 किमी पैदल चले। रास्ते में कदम बढ़ते जा रहे थे, क्योंकि मौत पीछा कर रही थी।

यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए शहाबुद्दीन ने बताया कि यूक्रेन से बाहर निकलने का एक-एक मंजर उनकी आंखों के सामने घूम रहा है। वह रेलवे स्टेशन पहुंचे थे कि 200 मीटर दूरी पर बम गिरा और सभी छात्र रेलवे स्टेशन के अंदर घुस गए। शहाबुद्दीन के अनुसार, दोपहर एक बजे रेलवे स्टेशन के पास हवा में मिसाइल दागी गई। हम लोग मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में चले गए।

दोपहर तीन बजे भारतीय दूतावास की एडवाइजरी आ गई कि खारकीव रेड जोन है। भारतीय नागरिक वहां से हट जाएं। रुक-रुककर बमबारी हो रही थी और निकलना जोखिमपूर्ण था। किसी तरह वे लोग पेसोचीन पहुंच गए। रोमानिया बार्डर छह किमी दूर था। चलने की हिम्मत नहीं थी, लेकिन मौत पीछा कर रही थी, इसलिए कदम बढ़ते जा रहे थे। रोमानिया में भारतीय दूतावास ने बहुत मदद की। 

बॉर्डर से सटे रूसी इलाके में भी धमाकों से सहमे विद्यार्थी, लौट रहे घर
रूस में एबीबीएस की पढ़ाई करने वाले कुछ विद्यार्थी भी अब घर लौट रहे हैं। ये ऐसे विद्यार्थी हैं, जो यूक्रेन की सीमा के करीब हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जंग की वजह से इन विद्यार्थियों के परिजन सहमे हुए हैं। देवरिया शहर के राघव नगर मोहल्ला निवासी व कपड़ा व्यापारी संतोष बरनवाल की बेटी उन्नति, रूस के किनया में एमबीबीएस की पढ़ाई करती थीं। जिस शहर में पढ़ती थीं, वहां से यूक्रेन की सीमा महज 70 किमी थी। सीमा पर मिसाइल और बम बरसाए जाते थे। संतोष ने बताया कि बेटी से बात होने पर वह कहती थी कि हम घर आना चाहते है। पूरा परिवार सहमा था। उनकी बेटी घर पहुंच गई तो परिवार बहुत खुश है।

यूक्रेन से लौटी याशिका, बोली-हालात सामान्य होने पर फिर जाएगी
यूक्रेन में फंसी आर्यनगर (मथुरा) निवासी करन सिंह एडवोकेट की पुत्री याशिका के लौटने पर परिजनों ने चैन की सांस ली। याशिका ने कहा कि हालात सामान्य होने के बाद वह पुन: यूक्रेन अपनी पढ़ाई पूरी करने जाएगी। बताया कि विपरीत परिस्थितियों में फंसकर अपने आप को सुरक्षित करते हुए घर तक पहुंचीं। उसके बैच के सभी साथी वतन लौट आए। संवाद

अबोहर (फाजिल्का)। निवासी दीक्षा विज बुधवार को यूक्रेन से लौटी तो स्थानीय विधायक समेत अन्य नागरिकों ने उसका स्वागत किया। राष्ट्रीय मेडिकल विश्वविद्यालय खारकीव में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा दीक्षा ने बताया कि  खारकीव से पिसोचिन तक पहुंचने में 15 किमी पैदल चलना पड़ा। इस दौरान रुमाल पर तिरंगा बना सुरक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल किया।

कमी रही होगी तो क्षमा करें : अनुराग ठाकुर
केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने ऊना में यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों से मुलाकात की। उन्होंने अभियान में किसी भी तरह की कमी के लिए क्षमा मांगी। कहा कि सरकार ने भरपूर कोशिश की है। पहले की सरकारों ने काम किया होता तो युवाओं को यूक्रेन नहीं जाना पड़ता। संवाद
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