प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की परंपरागक्त चिकित्सा पद्धति को वैश्विक मंच पर जो नई पहचान दी आज पूरी दुनिया उसका लोहा मानती है। 21 जून की तिथि विश्व योग दिवस के रूप में मनाया जाना उसका एक प्रमाण है। विश्व के 200 देश भारतीय योग की महान परंपरा से जुड़े हुए हैं।
इन्हीं सब को देखते हुए भारत सरकार ने 2014 में ही आयुष मंत्रालय का गठन अलग से करते हुए भारत की परंपरा का चिकित्सा पद्धतियों को व्यवहारिक स्वरूप प्रदान करने और उसके माध्यम से प्रत्येक नागरिक के लिए आरोग्यता प्रदान करने का जो लक्ष्य निर्धारित किया था, उसी का अनुसरण उत्तर प्रदेश सरकार ने भी किया। राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखने में राष्ट्रपति का आशीर्वाद व मार्गदर्शन प्राप्त होना सौभाग्य की बात है।
योग और आयुर्वेद के जनक गुरु गोरखनाथ को समर्पित है विश्वविद्यालय
सीएम योगी ने बताया कि योग की समस्त विशिष्ट विधाएं, चाहे हठ योग हो, राज योग, लय योग या फिर मंत्र योग हो, जिन्हें आप व्यावहारिक या क्रिया योग भी कहते हैं, इसके जनक महायोगी गुरु गोरखनाथ ही माने जाते हैं। महायोगी गोरखनाथ आयुर्वेद के रसशास्त्र के भी जनक हैं। योग के कई आसान नाथ योगियों के नाम पर हैं।
नवनाथों व 84 खनिजों के रस से जिस आपातकालीन दवाओं का प्रयोग चिकित्सा क्षेत्र में किया, उसके प्रणेता भी गुरु गोरखनाथ ही हैं। ऐसे में इस विश्वविद्यालय को उन्हें समर्पित किया गया। आयुष विश्वविद्यालय प्रदेश के 94 आयुष महाविद्यालयों में स्नातक की 7500 और परास्नातक की 525 सीटों के पाठ्यक्रम, सत्र, परीक्षा और परिणाम का नियमन करेगा।
सुदूर ग्रामीण इलाके में स्थापित किया गया यह विश्वविद्यालय
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह में जनता की भारी उपस्थिति यह बताती है कि सात सालों में लोक कल्याण के कार्यक्रम उनके घरों तक पहुंचे हैं। अब यह विश्वविद्यालय विकास को एक नया आयाम देगा और इस विश्वविद्यालय का स्थान उस सुदूर क्षेत्र को चुना गया, जहां आजादी के सात दशक बाद भी विकास की किरण नहीं पहुंच पायी है।
अब इस क्षेत्र का भी खूब विकास होगा। वहीं यह विश्वविद्यालय आयुष क्षेत्र की उत्कृष्टता का एक नया कदम होगा और पीएम मोदी की मंशा के अनुरूप आयुष को वैश्विक मंच पर सम्मानजनक स्थान दिलाने में अपनी उपयोगिता साबित करेगा।